Ramgarh/Ranchi: रामगढ़ के सयाल डी कोलियरी में एक ऐसा सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसकी मर्जी के बिना वहां से एक ढ़ेला कोयला भी नहीं उठा सकते. इस सिंडिकेट को संचालित कर रहा है कि कमेटी का नितेश कुमार गुप्ता और उसके साथी. और स्थानीय पुलिस वहां से कोयला उठाने वालों को मदद नहीं करती है. यानी भुरकुंडा पुलिस चुप रहती है. यहां तक कि अगर कोई कारोबारी इसके खिलाफ शिकायत के लिए आवेदन देता है, तो पुलिस प्राथमिकी ही नहीं दर्ज करती. 14-15 साल पहले यही काम चतरा के टंडवा में हुआ करता था.
Lagatar Media ने दो जून, तीन जून और पांच जून को इससे संबंधित खबरें भी प्रकाशित किया था. लेकिन रामगढ़ जिला प्रशासन या सीसीएल ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. ताजा मामला तिवारी इंटरप्राइजेज कंपनी से जुड़ा हुआ है. कंपनी ने सयाल डी कोलियरी में 500 टन कोयला का डीओ लगाया. सीसीएल ने कंपनी को 13 जुलाई से कोयला उठाने की अनुमति दी. लेकिन जब वह कोयला का उठाव करने पहुंचे तो नितेश गुप्ता व अन्य ने गाड़ी रोक दिया. नितेश कुमार गुप्ता खुद को सेल समिति का अध्यक्ष बताते हैं.
कंपनी के लोगों ने इसके बाद सीसीएल के सभी अधिकारियों से लेकर भुरकुंडा थाना प्रभारी से मिलकर मदद मांगी. लेकिन कहीं से अनुमति नहीं मिली. इसके बाद कंपनी की तरफ से शिव कुमार तिवारी ने भुरकुंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली. अंत में उन्होंने 23 जुलाई को ऑनलाइन कंप्लेन दर्ज कराया. हालांकि इस पर समाचार लिखे जाने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
दरअसल, सयाल कोलियरी में कम कीमत पर बीडिंग कर सीसीएल और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का खेल पिछले करीब साल भर से चल रहा है. पूरा काम एक सिंडिकेट बनाकर किया जाता है. बताया जाता है कि एक आपराधिक गिरोह भी पूरे खेल में शामिल है.
जानकारी के मुताबिक कोयले की बीडिंग ऑनलाइन होती है. कोई भी कोयला कारोबारी कहीं से भी अपनी रेट पर बीडिंग कर सकता है. करीब डेढ़ साल पहले कुछ ऐसा किया गया कि ज्यादा रेट पर बीडिंग करने वाले कोयला कारोबारी कोयला का उठाव ही नहीं कर पाया. यानी डिस्टर्ब किया गया. इससे आजीज आकर कारोबारियों ने वहां बीडिंग करना ही बंद कर दिया.
जब कारोबारियों ने ऊंची दर पर बीडिंग करना बंद कर दिया, तब एक सिंडिकेट में शामिल करीब दर्जन भर कंपनियों ने कम रेट पर बीडिंग करके कोयला उठाना शुरु किया है. इससे कारोबारियों को तो करोड़ों रूपये अधिक कमाई हो रही है, अफसरों की भी मोटी कमाई हो रही है, लेकिन सीसीएल और सरकार को बड़ा नुकसान हो रहा है.
करीब एक दर्जन कंपनियां हैं, जिन्होंने सिंडिकेट बना रखा है. सिंडिकेट बनाने में पप्पू नामक कारोबारी का सबसे बड़ा योगदान है. यही काम अब दूसरी कोलियरियों में भी करने की तैयारी है. इन्हें सहयोग मिलता है कोलियरी के दबंगों का. सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में सीसीएल विजिलेंस कार्रवाई करती है, लेकिन सयाल कोलियरी के मामले में कार्रवाई ना होने से कोयला कारोबारी हतप्रभ हैं.
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