Ranchi : पुरूलिया रोड स्थित एसडीसी सभागार में सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था संवाद के तीन दिवसीय रजत जयंती समारोह शुरू हुआ. इसका उद्घाटन अतिथियों ने सामूहिक रूप से नगाड़ा बजाकर किया, जिसने आदिवासी और लोक संस्कृति की जीवंत परंपरा को सजीव कर दिया. स्वागत भाषण शशि बारला ने दिया. पारंपरिक अंदाज में संस्था के 25 वर्षों की यात्रा को याद किया गया. उन्होंने कहा कि संवाद ने इस दौरान हंसी, आंसू और संघर्षों को साझा किया. समाज के वंचित वर्गों के साथ मजबूत रिश्ता है.
संस्था के सचिव घनश्याम भाई ने कहा कि यह 25 साल सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि शोषित और वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की वैचारिक प्रक्रिया रही है. उन्होंने कहा कि हमारा सपना आदिवासी युवाओं को संगठित करने और महिलाओं के भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करने का था. आज 758 गांवों के करीब 2 लाख मजदूर-किसान संवाद से जुड़े हैं, जिनमें 53 प्रतिशत महिलाएं हैं. अब संस्था की कमान पूरी तरह महिलाओं को सौंपी जाएगी, ताकि उन्हें नेतृत्व में आगे लाकर स्वशासन और बराबरी आधारित समाज को मजबूत किया जा सके.
गिरिजा ने कहा कि नई संस्थाओं को बनाकर मुद्दों से जोड़ना होगा. संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा. पेट्रोलियम पदार्थ पर दुनिया निर्भर नहीं रहे वैकल्पिक ऊर्जा की व्यवस्था करनी होगी. उद्घाटन सत्र के बाद वैश्विक परिदृश्य में संगठनों की भूमिका’ विषय पर परिचर्चा हुई.
वक्ताओं ने सामूहिक प्रयास, वैकल्पिक ऊर्जा और सामाजिक सरोकारों पर जोर दिया. इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार साझा किए. मौके पर जॉनसन, प्रोफेसर रवि भूषण, उषा विश्वकर्मा, वंदना टेटे, मनीषा बनर्जी, प्रभा जायसवाल, कोरदुला कुजूर, पंकज और शरद समेत अन्य शामिल थे.
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