Ranchi : मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती पर आज जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में श्रद्धांजलि एवं विचार-विमर्श किया गया. यह कार्यक्रम झारखंड जनाधिकार महासभा एवं मुण्डा सभा ने आयोजित किया. कार्यक्रम का उद्देश्य संविधान निर्माण में उनके अमूल्य योगदान तथा आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष को स्मरण करना था.
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, युवाओं एवं विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. इस अवसर पर जयपाल सिंह मुंडा के विचारों, विशेषकर आदिवासी समाज, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय को लेकर उनके दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की गई.
कार्यक्रम में झारखंड जनाधिकार महासभा से टॉम कावला, एलिना होरो, लीना पदम, अलका आईंद, आकांक्षा बिहान एवं मनोज तिरु, मुण्डा सभा से बिलकन डांग, पी.एस. सांगा, तनूजा मुंडा, सोसन समद तथा माले से राम नरेश सिंह और सुदामा खलखो सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और जयपाल सिंह मुंडा के जीवन एवं संघर्ष पर प्रकाश डाला.
वक्ताओं ने कहा कि मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा (03 जनवरी 1903 – 20 मार्च 1970) आधुनिक भारत के उन महान नेताओं में से थे जिन्होंने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया. वे एक प्रख्यात शिक्षाविद्, ओलंपियन हॉकी कप्तान, संविधान सभा के सदस्य और आदिवासी राजनीति के अग्रदूत थे. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया.
संविधान सभा में उन्होंने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और स्वशासन की परंपराओं की प्रभावी वकालत की. वे झारखंड राज्य की अवधारणा के प्रमुख सूत्रधारों में से एक थे और जीवनभर आदिवासी समाज की आवाज बने रहे.
कार्यक्रम को उपस्थित साथियों की सजग भागीदारी ने सार्थक बनाया. यह आयोजन न केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर था, बल्कि उनके सपनों के झारखंड और समानता पर आधारित भारत के निर्माण के संकल्प को दोहराने का भी माध्यम बना.
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