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रांची : गोस्सनर कॉलेज में हुआ दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

Ranchi : गोस्सनर कॉलेज, रांची के मनोविज्ञान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा 21वीं सदी में मनोविज्ञान अंतर्दृष्टि, चुनौतिया और परिवर्तनकारी समाधान विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया.इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, प्रशासकों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया.

 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. जय प्रकाश, अतिरिक्त प्रोफेसर (क्लिनिकल साइकोलॉजी), रिनपास, कांके ने मानसिक स्वास्थ्य के निर्माण में परिवार की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को अलग-थलग समझा नहीं जा सकता. बचपन का अभाव, आघात, पारिवारिक संवाद और देखभाल का बोझ मानसिक बीमारी की शुरुआत, प्रगति और पुनर्प्राप्ति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

 

बाल मानसिक स्वास्थ्य पर बोलते हुए डॉ. मस्रूर जहां, अतिरिक्त प्रोफेसर, क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग, रिनपास ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act) के कानूनी और नैदानिक पहलुओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि कानून समावेशन का मजबूत ढांचा प्रदान करता है, लेकिन मूल्यांकन, प्रमाणन और समय पर हस्तक्षेप के प्रति जागरूकता भी आवश्यक है.

 

प्रशासनिक दृष्टिकोण से डॉ. मनीष रंजन (आईएएस, महानिदेशक, श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान (SKIPA), झारखंड सरकार) ने शासन में मनोविज्ञान की भूमिका को रेखांकित किया.उन्होंने कहा कि प्रभावी नेतृत्व के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नैतिक मूल्यों की भी आवश्यकता होती है.

 

अपने शोध प्रस्तुत करते हुए अबुबकर सिद्दीकी (आईएएस, सचिव, कृषि विभाग, झारखंड सरकार) ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के नेतृत्व पर विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि आरक्षण से अवसर मिले हैं. लेकिन वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है, जब महिलाएं आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व की भूमिका निभाती हैं.

 

मुख्य वक्ता डॉ. श्रुति नारायण (सहायक प्रोफेसर, पटना विश्वविद्यालय) ने नेतृत्व के मनोवैज्ञानिक निर्धारकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्म-प्रभाविता, लचीलापन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को प्रभावी नेतृत्व के लिए सक्षम बनाती है.

 

अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं में प्रो. गैब्रिएल क्रुक्स-विस्नर (यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया, अमेरिका) ने नागरिकता और शासन पर वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया. अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं में प्रो. नित्या राव (यूके), प्रो. प्रभात बर्नवाल, प्रो. बी. एल. दुबे और डॉ. कृति वशिष्ठ शामिल रहीं.

 

सम्मेलन की परिकल्पना पर बोलते हुए मुख्य संयोजक डॉ. अन्निता रंजन, सहायक प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, गोस्वर कॉलेज ने कहा कि यह सम्मेलन मनोविज्ञान, नीति और व्यवहार के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया.

 

करीब 200 प्रतिनिधियों की भागीदारी वाले इस सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन और समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें सभी वक्ताओं, प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों और छात्र स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की गई.

 

 

 

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