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रांची: फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 14 जिलों में जागरूकता रथ रवाना

Ranchi : झारखंड में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की है. इसी क्रम में राज्य के 14 जिलों में अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता रथ को रवाना किया गया. यह कार्यक्रम गुरुवार को आईपीएच प्रेक्षागृह, नामकुम, रांची में आयोजित किया गया.
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Ranchi : झारखंड में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की है. इसी क्रम में राज्य के 14 जिलों में अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता रथ को रवाना किया गया. यह कार्यक्रम गुरुवार को आईपीएच प्रेक्षागृह, नामकुम, रांची में आयोजित किया गया. 


कार्यक्रम में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया.

 

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी बिरेंद्र कुमार सिंह, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. अभिषेक, परिमल संस्था के पदाधिकारी सहित जिला परिषद अध्यक्ष, चिकित्सक, एएनएम, प्रखंड प्रमुख, मुखिया, सहिया और सेविकाएं उपस्थित रहीं.

 

जागरूकता रथ को रवाना करने के बाद फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर उन्मुखीकरण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है और इसे सफल बनाने के लिए सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है. 
उन्होंने बताया कि वर्ष 2029 तक पूरे झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा का वितरण और सेवन सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे बिना किसी संकोच के दवा का सेवन करें.

 


स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यह अभियान 14 जिलों में चलाया जा रहा है, जबकि 9 जिलों में पहले ही यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के प्रमुख जिलों में शीघ्र मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होंगी.

 

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि फाइलेरिया पूरी तरह से रोकथाम योग्य बीमारी है और शत-प्रतिशत दवा सेवन से इसे जड़ से समाप्त किया जा सकता है. उन्होंने आमजन से अपील की कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी जा रही दवा का अवश्य सेवन करें, ताकि झारखंड को फाइलेरिया मुक्त राज्य बनाया जा सके.

 

कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जिसमें हाथ-पैर हाथीपांव जैसे हो जाते हैं और बाद में इसका इलाज बेहद कठिन हो जाता है. 


उन्होंने बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को यह दवा लेनी चाहिए. उन्होंने जल जमाव रोकने, मच्छरदानी के उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने पर भी जोर दिया.

 

कार्यक्रम के अंत में राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी बिरेंद्र कुमार सिंह ने सभी जिलों के पदाधिकारियों से अपील की कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक दवा पहुंचाई जाए और यदि कोई व्यक्ति दवा लेने से मना करे तो उसे समझाकर प्रेरित किया जाए. उन्होंने सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की. 

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