Ranchi : झारखंड में रक्तदान-महादान को लेकर सरकार की उदासीनता पर लहू बोलेगा रक्तदान संगठन रांची और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन ने चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि राज्य के अधिकांश सरकारी और निजी ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी बनी हुई है, जिससे मरीजों और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
संगठन के अनुसार राज्य में रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त प्रोत्साहन, सम्मान और जागरूकता अभियान नहीं चलाए जा रहे हैं. रक्तदान को महादान के रूप में स्थापित करने के लिए व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है, लेकिन इस दिशा में ठोस पहल नहीं हो रही है.
संगठन ने यह भी कहा कि रक्तदान के लिए बनाई गई वातानुकूलित सरकारी वॉल्वो रेड बस पिछले आठ महीनों से खराब पड़ी है, जिससे रक्तदान शिविरों के आयोजन में काफी दिक्कत आ रही है. गर्मी के मौसम में रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए भी सरकार की ओर से कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है.
लहू बोलेगा संगठन का कहना है कि रक्तदान अभियान को मजबूत बनाने के लिए रक्तदान आयोजकों के साथ सरकार को मंथन करना चाहिए. वर्तमान में राज्य के 24 जिलों में रक्तदान की स्थिति कमजोर है और कई सरकारी ब्लड बैंक तथा रेड क्रॉस सोसाइटी में तकनीकी उपकरण, सामग्री, कंपोनेंट और बुनियादी सुविधाओं की कमी है.
संगठन ने यह भी बताया कि रिम्स सहित राज्य के 24 जिलों के ब्लड बैंक के पास अपनी वातानुकूलित सहज बस नहीं है, जिससे दूर-दराज क्षेत्रों में रक्तदान शिविर लगाने में कठिनाई होती है. इसके अलावा रक्तदान से जुड़ी वैज्ञानिक और मानवीय जानकारी को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय भाषाओं में पर्चे के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की भी व्यवस्था नहीं है.
संगठन ने कहा कि राज्य के कई ब्लड बैंक में मैनपॉवर की भी भारी कमी है, जिससे रक्त संग्रहण और प्रबंधन प्रभावित हो रहा है. लहू बोलेगा रक्तदान संगठन और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि रक्तदान-महादान को लेकर राज्य स्तर पर ठोस नीति बनाकर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके.
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