Ranchi: रांची में एक महिला अधिवक्ता के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. एसटी-एससी थाना प्रभारी की कार्यशैली के खिलाफ रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है. शुक्रवार को विरोध स्वरूप वकीलों ने खुद को न्यायिक कार्यों से दूर रखा, लेकिन इसके बावजूद रांची पुलिस की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराजगी बढ़ गई है.
क्या है पूरा मामला
घटना बीते गुरुवार की है, जब अधिवक्ता सविता कुजूर अपनी कुछ सहकर्मी वकीलों के साथ एक मुवक्किल की शिकायत दर्ज कराने एसटी-एससी थाना पहुंची थीं. आरोप है कि वहां तैनात जांच अधिकारी महेंद्र बाड़ा ने पहले शिकायत दर्ज करने में आनाकानी की. जब अधिवक्ता अपनी कानूनी मांग को लेकर थाना प्रभारी महेश मुंडा से मिलने पहुंचीं, तो सहयोग करने के बजाय अधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया.
शिकायत के मुताबिक, थाना प्रभारी ने कथित तौर पर गलत नीयत से सविता कुजूर का हाथ पकड़ा और उन्हें दीवार की ओर धक्का दे दिया. महिला वकीलों का आरोप है कि थाने के भीतर उनके साथ न केवल धक्का-मुक्की हुई, बल्कि गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का भी प्रयोग किया गया.
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
रांची जिला बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है. एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही ने स्पष्ट किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वकीलों का आक्रोश कम नहीं होगा. बार एसोसिएशन ने कहा कि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि पुलिस अपने बचाव में साक्ष्यों को प्रभावित न कर सके.
दोषी थाना प्रभारी को हटाने की मांग
उन्होंने कहा कि दोषी थाना प्रभारी महेश मुंडा को तत्काल पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर उन्हें निलंबित किया जाए. राज्य में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को अविलंब लागू किया जाए ताकि कार्यस्थल और थानों में वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
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