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रांची क्लब ने करीब तीन दशक बाद आयकर का भुगतान किया

रांची क्लब ने करीब तीन दशक बाद आयकर का भुगतान किया है. पटना हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 1991 में दिये गये फैसले के आलोक में रांची क्लब द्वारा आयकर का भुगतान नहीं किया जाता था.
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Ranchi : रांची क्लब ने करीब तीन दशक बाद आयकर का भुगतान किया है. पटना हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 1991 में दिये गये फैसले के आलोक में रांची क्लब द्वारा आयकर का भुगतान नहीं किया जाता था.

 

न्यायालय ने उसे रांची क्लब mutuality के दायरे में रखते हुए उसे आयकर से छूट दे दी थी. न्यायालय के फैसले के आलोक में क्लब द्वारा आयकर का भुगतान नहीं किया जाता था.

 

सूत्रों के अनुसार रांची क्लब ने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए करीब एक करोड़ रुपये की आमदनी से संबंधित आयकर रिटर्न दाखिल किया है. साथ ही इस आमदनी पर टैक्स की रकम अदा की है.

 

आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा ने रांची क्लब से टैक्स जमा कराने के लिए NUDGE (Non Intrusive Usages Of Data to Guide and Enable) का सहारा लिया.

 

इस प्रक्रिया के तहत बिना किसी कठोर कार्रवाई के तथ्यों और नियमों के आधार पर क्लब को अपनी आमदनी पर आयकर देने के लिए प्रेरित किया गया.

 

साथ ही कानूनी प्रावधानों का हलावा देकर यह बताया गया कि क्लब के सदस्यों द्वारा दी जाने वाली राशि के अलावा क्लब को होने वाली दूसरी आमदीन पर आयकर देय है.

 

सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा रांची ने क्लब को समन भेजा था. समन के आलोक में हुई सुनवाई के दौरान क्लब को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गयी. साथ ही यह बताया गया कि सदस्यों के अलावा अन्य स्रोतों से होने वाली आमदनी पर आयकर देय है.

 

सुनवाई के दौरान उठाये गये कानूनी बिंदुओं से सहमत होने के बाद क्लब ने पहले से मिल रहे छूट को छोड़ कर नियमानुसार आयकर देने का फैसला किया और आयकर का भुगतान किया. साथ ही क्लब ने विभाग को भविष्य में भी अपनी आमदनी पर आयकर चुकाने का वायदा किया.

 

उल्लेखनीय है कि Assessment Year 1977-78 में आयकर अधिकारी द्वारा रांची क्लब पर आयकर लगाया गया था. क्लब ने पहले इसे आयकर विभाग के सक्षम पदाधिकारी के पास चुनौती दी. बाद में यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा.

 

हाईकोर्ट ने आयकर विभाग और रांची क्लब का पक्ष सुनने के बाद वर्ष 1991 में फैसला सुनाया. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि क्लब mutuality के दायरे में आता है.

 

यानी अगर क्लब के लोग आपस में मिल कर पैसा जमा कर कुछ करते हैं तो यह आयकर के दायरे में नहीं आता है. हाईकोर्ट के इस फैसले के आलोक में रांची क्लब द्वारा छूट से संबंधित रिटर्न दाखिल किया जाता था.

 

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