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Ranchi : पूर्व डायरेक्टर ने BCI मानकों की अनदेखी, फैकल्टी की कमी व नियुक्तियों पर उठाए सवाल

  • कोर्ट ने 6 सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी

Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी को लेकर मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. छात्रों द्वारा दायर याचिका के बीच संस्थान के पूर्व डायरेक्टर मयंक मिश्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर नियमों की अनदेखी और संस्थान की व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं.

 

पूर्व डायरेक्टर के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्धारित मानकों के तहत संस्थान में 10 स्थायी पूर्णकालिक फैकल्टी और एक स्थायी डायरेक्टर होना चाहिए, जबकि वर्तमान में शिक्षक अनुबंध पर कार्यरत हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि संस्थान में स्मार्ट मूट कोर्ट रूम और नई सुविधाओं वाली लाइब्रेरी जैसी अनिवार्य सुविधाओं का भी अभाव है.

 

मयंक मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर संभावित खतरे से आगाह किया था. उनके अनुसार, यदि BCI निरीक्षण में कमियां सामने आतीं तो मान्यता और छात्रों की डिग्री प्रभावित हो सकती थी.

 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अदालत में दायर प्रारंभिक हलफनामे में स्थायी फैकल्टी नियुक्त होने का दावा किया गया था. उन्होंने नए इंचार्ज डायरेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नियुक्त व्यक्ति के पास कानून विषय की डिग्री नहीं है.

 

वहीं, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि मूट कोर्ट और लाइब्रेरी से संबंधित कार्य शुरू कर दिए गए हैं और डायरेक्टर और फैकल्टी नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है. अदालत ने विश्वविद्यालय को आवश्यक कदम नियमानुसार पूरा करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि तय अवधि के भीतर विश्वविद्यालय अदालत और नियमों के अनुसार मानकों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है.

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