Ranchi : कांग्रेस के गोवा, दमन एवं दादरा नगर हवेली के प्रभारी मानिक राव ठाकरे ने राम मंदिर दान मामले को लेकर केंद्र और यूपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, लेकिन अब तक भाजपा या राज्य सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई है.
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इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, महासचिव राजीव रंजन, वरिष्ठ नेता शाहजादा अनवर, सोनल शांति और राजन वर्मा भी मौजूद थे.
मानिक राव ठाकरे ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ था, तो इस कथित घोटाले की जिम्मेदारी कौन लेगा. उन्होंने पूछा कि यदि सब कुछ सही था, तो ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस्तीफा क्यों देना पड़ा. उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए.
कांग्रेस नेता ने मांग की कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और मामले में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए. साथ ही वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों और विशेषज्ञों को शामिल करते हुए नया पारदर्शी ट्रस्ट गठित किया जाए. उन्होंने मंदिर को मिले चंदे, चढ़ावे, जमीन की खरीद-बिक्री और आयोजनों पर हुए खर्च का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की.
ठाकरे ने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे यह संकेत देते हैं कि मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का हो सकता है. उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को हटाए जाने पर भी सवाल उठाए. साथ ही कहा कि ट्रस्ट के नए महासचिव बनाए गए कृष्णमोहन पर पहले से ही मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं.
उन्होंने दावा किया कि एसआईटी मंदिर के बड़े आयोजनों के खर्च की भी जांच कर रही है. उनके अनुसार, 22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये और 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये खर्च होने की जांच की जा रही है. इसके अलावा फर्जी रसीदों और नकद चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप भी जांच के दायरे में हैं.
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एसआईटी रिपोर्ट में ट्रस्ट और उसके बैंकिंग पार्टनर भारतीय स्टेट बैंक की गंभीर लापरवाहियां उजागर हुई हैं. उनके अनुसार, जांच में 70 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें नोट गिनने वाले कर्मचारी नकदी और नोटों की गड्डियां कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाकर ले जाते दिखे. उन्होंने कहा कि सीसीटीवी निगरानी के बावजूद प्रवेश और निकास के दौरान अनिवार्य तलाशी नहीं ली गई. ठाकरे ने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद केवल आठ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश क्यों की गई.
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