Ranchi : रांची स्थित सूचना भवन के सामने जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव चौक पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राज्य की राजनीति, समाज और आंदोलन की सभी धाराएं एक साथ नजर आईं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, चंपाई सोरेन, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, मंत्री सुदिव्य सोनू, भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू सहित राज्य के तमाम वरिष्ठ नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी दिनभर श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे या अपना श्रद्धांजलि संदेश भेजा.
यह दृश्य अपने-आप में जस्टिस शाहदेव की उस विरासत का प्रमाण था, जिसने राजनीति से ऊपर उठकर झारखंड को एक सूत्र में बांधा.
कार्यक्रम की शुरुआत जस्टिस शाहदेव के परिवार द्वारा श्रद्धांजलि से हुई. उनकी ज्येष्ठ पुत्री संगीता सिंह, दामाद रतन कुमार,कृति सिंह, पुत्र प्रतुल शाहदेव, पुत्रवधू डॉ. विद्या झा शाहदेव एवं पौत्र शौर्य प्रताप शाहदेव ने सर्वप्रथम पुष्प अर्पित कर नमन किया.
जस्टिस शाहदेव ने झारखंड आंदोलन को बौद्धिक ऊर्जा दी-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव न्यायपालिका में रहते हुए भी झारखंड आंदोलन को अपनी बौद्धिक शक्ति से सींचते रहे. वे किसी दल की सीमा में नहीं बंधे, बल्कि झारखंड की आत्मा के लिए लड़े. आने वाली पीढ़ियों को उनके दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए.
झारखंड अलग राज्य आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान किए थे जस्टिस शाहदेव- बाबूलाल मरांडी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जस्टिस एलपीएन शाहदेव ने झारखंड अलग राज्य आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान किए थे, सेवानिवृत्ति होने के बाद वह झारखंड आंदोलन में सक्रिय रहे, जो लोग झारखंड अलग राज्य के पक्ष में नहीं थे उनका भी आंख खोलने का काम किए थे जस्टिस शाहदेव.
जस्टिस शाहदेव ने झारखंड आंदोलन को नई दिशा देने का काम किए थे- सुदिव्य सोनू
झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन में जस्टिस शाहदेव की भूमिका ऐतिहासिक रही. वो झारखंड आंदोलन को नई दिशा देने का काम किए थे. झारखंड की पीढ़ियां सदैव उनका ऋणी रहेगा.
झारखंड अलग राज्य आंदोलन के रणनीतिकार थे जस्टिस शाहदेव- चंपाई सोरेन
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि जस्टिस शाहदेव एक बुद्धिजीवी थे और झारखंड आंदोलन में उनकी अहम भूमिका थी झारखंड अलग राज्य आंदोलन के रणनीतिकार थे, उनके यहां के माटी से जुड़ाव था आज उनके दिखाए गए रास्ते पर हम सभी को चलना चाहिए ऐसे महापुरुष को नमन.
झारखंड आंदोलन के स्तंभ थे जस्टिस शाहदेव- संजय सेठ
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि जस्टिस शाहदेव के बिना झारखंड आंदोलन की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने हर मंच पर झारखंड अलग राज्य की आवाज उठाई.
आदिवासी-मूलवासी के अधिकारों के लिए जीवन भर लड़े- आदित्य साहू
भाजपा झारखंड के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य प्रसाद साहू ने कहा कि जस्टिस शाहदेव ने आंदोलन को बौद्धिक दिशा दी. वे झारखंड के आदिवासी-मूलवासी के विकास को लेकर सदैव चिंतित रहते थे, यहां के सभी वर्गों के दुख-सुख में हमेशा साथ रहते थे.
झारखंड की निर्णायक लड़ाई के अग्रणी योद्धा थे जस्टिस शाहदेव- सीपी सिंह
रांची के विधायक सी.पी सिंह ने कहा कि झारखंड आंदोलन की निर्णायक लड़ाई में जस्टिस शाहदेव का नेतृत्व ऐतिहासिक रहा. श्री सिंह ने यह भी कहा कि जब तक सूरज चांद रहेगा तब तक जस्टिस शाहदेव जी का नाम रहेगा.
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाजपा, कांग्रेस, आजसू, राजद, जदयू सहित सभी दलों के नेता, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों आंदोलनकारी शामिल हुए.राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी ने एक स्वर में कहा कि जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव झारखंड की आत्मा थे और रहेंगे.
आज श्रद्धांजलि देने वालों में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजीव रंजन प्रसाद, भाजपा रांची महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, ग्रामीण अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता किशोर नाथ शाहदेव, चैंबर अध्यक्ष आदित्य मेहरोत्रा, महासचिव रोहित अग्रवाल जेडीयू प्रवक्ता सागर कुमार, भाजपा नेता शिवपूजन पाठक, राहुल अवस्थी, दिनेश प्रसाद साहू, अजय कुमार, लोकेश चौधरी, अजय कुमार, राजेंद्र तिवारी, ज्ञान रंजन, सुजीत, सुमित रुंगटा, संतोष, सत्य प्रकाश चंदेल, सुबोजीत देब, लोकेश कुमार, राजू वारसी, कृष्ण अग्रवाल, उदय चौहान, भीम प्रभाकर सुभाष साहू, मुरारी, अनीश कुमार सिंह , बलराम सिंह, गिरजा शंकर ओझा, रामेश्वर दयाल सिंह, यश सिंह परमार आशुतोष, अजय सरावली, राकेश श्रीवास्तव, संदीप नागपाल, प्रमोद पांडे, प्रभाकर चौबे, नरेंद्र साहू सहित सैकड़ो लोगों ने श्रद्धांजलि दी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.



Leave a Comment