Ranchi : श्री जीण माता प्रचार समिति की ओर से 9 अगस्त को हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन परिसर में मां जीण भवानी का सावन सिंधारा उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा. दोपहर 3 बजे शुरू होने वाला यह आयोजन रात 8 बजे महाआरती के साथ संपन्न होगा. इस धार्मिक आयोजन में करीब 800 महिलाएं शामिल होंगी.
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा और मां जीण भवानी की ज्योत प्रज्ज्वलित करने के साथ होगी. इसके बाद गुजरात से आईं भजन गायिका आशा वैष्णव और पुरुलिया की शीतल कटारुका भजनों की प्रस्तुति देंगी. भजनों के साथ मां की आकर्षक झांकियां भी सजाई जाएंगी, जिनमें चौसठ योगिनी स्वरूप विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा.

9 अगस्त को समारोह
उत्सव के दौरान श्रद्धालु मां को चुनड़ी, गजरा, मेहंदी, निशान और मिठाइयां अर्पित करेंगे. समिति के पदाधिकारियों बताया कि सावन माह में महिलाओं और बेटियों द्वारा मां पार्वती और भगवान शिव की आराधना के साथ सावन सिंधारा मनाने की परंपरा रही है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल मां जीण भवानी का विशेष श्रृंगार, भजन-कीर्तन और पूजन किया जाता है.
समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में उपाध्यक्ष विजय पालड़ीवाल, सचिव नारायण विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष बजरंग सोमानी सहित समिति के कई पदाधिकारी और महिला सदस्य जुटे हुए हैं. आज कार्यक्रम को लेकर संवाददाता सम्मेलन का आयोजन होगा.
आस्था और इतिहास से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
मां जीण भवानी का धाम देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां जीण भवानी का मूल नाम जीवण बाई था. उनका जन्म राजस्थान के चूरू जिले के घांघू गांव में चौहान वंश के राजा गांगोसिंह के घर हुआ था. उनके बड़े भाई हर्ष को भगवान भैरव का अवतार और मां जीण भवानी को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है.
मान्यता है कि पारिवारिक विवाद के बाद जीवण बाई अरावली पर्वतमाला के काजल शिखर पर चली गईं और वहां कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी शक्ति प्रकट हुईं और जीवण बाई देवी स्वरूप में प्रतिष्ठित हो गईं. तभी से वे मां जीण भवानी के नाम से पूजी जाने लगीं.
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित मां जीण भवानी का प्राचीन मंदिर करीब एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है. चूना पत्थर और संगमरमर से बने इस मंदिर में हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर के पास ही मां के भाई हर्ष भैरवनाथ का मंदिर भी स्थित है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर के पट पूरे वर्ष खुले रहते हैं और ग्रहण के समय भी यहां नियमित आरती होती है. यही वजह है कि मां जीण भवानी का धाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए शक्ति, आस्था और विश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.
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