Ranchi: रांची नगर निगम में मेयर पद को इस बार प्रतिष्ठा की सीट माना जा रहा है. 11 उम्मीदवार मेयर पद पर खड़े हैं. मेयर पद पर चर्चित उम्मीदवारों में रमा खलखो, रोशनी खलखो और सुजीत विजय आनंद कुजूर और सुजाता कच्छप हैं. जो राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं. चुनाव गैर-दलीय आधार पर हो रहा हो, लेकिन मैदान पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा नजर आ रहा है.
सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े नेता अपने समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं, तो वहीं विपक्षी दल भी पूरी ताकत झोंक चुके हैं. शहर के विभिन्न वार्डों में सुबह से लेकर देर शाम तक घर-घर संपर्क, नुक्कड़ सभाएं और पदयात्राएं जारी हैं.
झारखंड में हो रहे नगर निकाय चुनाव में आधिकारिक तौर पर प्रत्याशी किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ रहे हैं, फिर भी लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में खुलकर प्रचार कर रहे हैं.
राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस पार्टी, मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) जैसे दल भले ही औपचारिक रूप से उम्मीदवार घोषित नहीं कर रहे, लेकिन उनके नेता वार्डों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
मेयर प्रत्याशियों के लिए बड़े नेताओं का प्रचार
रांची नगर निगम में मेयर पद के एक प्रत्याशी रमा खलखो के समर्थन में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और मंत्री दीपिका पांडे सिंह जनसंपर्क अभियान में जुटे हैं.
दूसरी ओर भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो के पक्ष में राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत कई विधायक चुनावी मैदान में सक्रिय हैं और वार्ड-वार बैठकें कर समर्थन जुटा रहे हैं.
लोकसभा जैसा जोश
चुनावी प्रचार का तरीका भले ही स्थानीय निकाय का हो, लेकिन रणनीति विधानसभा या लोकसभा चुनाव जैसी दिखाई दे रही है. समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में दलीय नेता घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं. छोटे-छोटे नुक्कड़ सभाएं, वार्ड स्तरीय बैठकें और सोशल मीडिया अभियान के जरिए मतदाताओं को साधने की कोशिश हो रही है. स्थानीय कार्यकर्ताओं को वार्डवार जिम्मेदारी सौंपी गई है.
स्थानीय मुद्दों पर टिका चुनाव
इस बार चुनाव में सड़क, नाली, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और होल्डिंग टैक्स जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. विपक्ष नगर निगम की कार्यप्रणाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोल रहा है, जबकि सत्ताधारी दल विकास योजनाओं और आगामी परियोजनाओं को जनता के सामने रख रहा है.
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