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Ranchi : नगाड़ों से गूंजा मोरहाबादी मैदान, दिखी झारखंड की आदिवासी कला-संस्कृति

Ranchi : मोरहाबादी मैदान में झारखंड आदिवासी महोत्सव में रविवार को झारखंड की आदिवासी कला, संस्कृति और परंपराओं का गवाह बना. झारखंड आदिवासी महोत्सव में राज्यभर से आए आदिवासी समाज के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ शामिल हुए. मैदान में छोटे-बड़े करीब एक हजार नगाड़ों की गूंज सुनाई दी. अलग-अलग स्थानों पर नगाड़ा और मांदर की टीमों ने पारंपरिक धुनें बजाईं. महिला और पुरुष कलाकारों ने भी उत्साह के साथ नगाड़ा और मांदर बजाया.
 

Ranchi : मोरहाबादी मैदान में झारखंड आदिवासी महोत्सव में रविवार को झारखंड की आदिवासी कला, संस्कृति और परंपराओं का गवाह बना. झारखंड आदिवासी महोत्सव में राज्यभर से आए आदिवासी समाज के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ शामिल हुए. मैदान में छोटे-बड़े करीब एक हजार नगाड़ों की गूंज सुनाई दी. अलग-अलग स्थानों पर नगाड़ा और मांदर की टीमों ने पारंपरिक धुनें बजाईं. महिला और पुरुष कलाकारों ने भी उत्साह के साथ नगाड़ा और मांदर बजाया.

 

पहली बार एक मंच पर दिखे 32 जनजातीय समुदाय

महोत्सव में पहली बार राज्य के 32 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति को एक मंच पर प्रदर्शित किया गया. अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी पारंपरिक पहचान और वाद्ययंत्रों के साथ पहुंचे. महोत्सव में पांच जनजातीय भाषाओं से जुड़ी गतिविधियों के साथ पेंटिंग कलाकारों ने भी अपने कैनवास लगाए.

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कलाकार हुए शामिल

छह हजार कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति

महोत्सव में करीब छह हजार कलाकार अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ शामिल हुए. पूरे मैदान में अलग-अलग समूहों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से आदिवासी कला और परंपरा की झलक देखने को मिली. पारंपरिक गीत, नृत्य और वाद्ययंत्रों की धुनों ने पूरे परिसर को आदिवासी उत्सव के रंग में रंग दिया.

 

संघर्ष और बलिदान की कहानी ऑडियो-विजुअल में

महोत्सव में आदिवासी समाज के हक-अधिकार की लड़ाई और संघर्ष की कहानी को भी प्रदर्शित किया गया. करीब 10 मिनट के ऑडियो-विजुअल के जरिए पद्म श्री शिबू सोरेन के संघर्ष और बलिदान को भी दिखाए गए. इसके अलावा 1857 की क्रांति, बिरसा मुंडा के उलगुलान और अन्य आदिवासी वीर सपूतों के संघर्ष और बलिदान को भी झारखंड आदिवासी महोत्सव के मंच से याद किया गया.

 

अरगोड़ा से सैकड़ों लोगों ने निकाला पैदल मार्च

महोत्सव के दौरान विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ भागीदारी की. अरगोड़ा क्षेत्र से सैकड़ों आदिवासी समाज के लोग पैदल मार्च करते हुए अल्बर्ट एक्का चौक पहुंच. यहां परमवीर अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया.


वहीं, जय आदिवासी परिषद की ओर से उलगुलान यात्रा निकाली गई. यात्रा के दौरान भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल और जेल पार्क में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. इस दौरान लोगों ने आदिवासी समाज के अधिकारों और अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए संकल्प भी लिया.


महोत्सव में एक ओर जहां हजारों कलाकारों की प्रस्तुतियों ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को सामने रखा. वहीं, दूसरी ओर विभिन्न संगठनों की गतिविधियों में समाज की एकजुटता और अपने इतिहास के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया.

 

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