Ranchi : रांची के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब नगर निगम चुनाव के लिए वार्डवार आरक्षण की नई सूची सार्वजनिक हुई. यह केवल एक सूची नहीं, बल्कि कई दिग्गजों के लिए सियासी 'चेक और मेट' जैसी स्थिति है. 2018 के मुकाबले 2026 का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि पुराने चेहरों को अब अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी होगी.
पिछड़ा वर्ग का 'विभाजन': अब EBC-I का दबदबा
सबसे क्रांतिकारी बदलाव पिछड़ा वर्ग की सीटों में देखा गया है. पहले जहां 13 सीटें एकमुश्त पिछड़ा वर्ग के लिए थीं, उन्हें अब दो तकनीकी श्रेणियों में बांट दिया गया है:
EBC-1 (अत्यंत पिछड़ा वर्ग): इस श्रेणी को 09 सीटें दी गई हैं, जिससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पिछड़ों को प्रतिनिधित्व का बड़ा मौका मिला है.
BC-II (पिछड़ा वर्ग): इस श्रेणी के हिस्से में 04 सीटें आई हैं.
इस विभाजन से पिछड़ी जातियों के भीतर का राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल गया है.
रोटेशन का खेल: महिला और एसटी-एससी सीटों में उलटफेर
रोटेशन पद्धति ने कई 'सुरक्षित' सीटों का स्वरूप बदल दिया है.
महिला शक्ति का विस्तार: वार्ड नंबर 3, 10, 25, 39, 42, 46 और 50 जैसे क्षेत्रों में अब महिला प्रत्याशियों का कब्जा होगा. ये सीटें या तो पहले 'अन्य' (पुरुषों के लिए खुली) थीं या अब पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई हैं.
ST सीटों में रोटेशन: अनुसूचित जनजाति की 11 सीटों में बड़ा बदलाव हुआ है. वार्ड 2, 35, 36 और 53 अब ST महिला के लिए आरक्षित हैं, जबकि वार्ड 1, 12, 13, 47 और 51 अब ST (अन्य) की श्रेणी में आ गए हैं.
SC सीटों की अदला-बदली: वार्ड 5 अब एससी (अन्य) हो गया है, जबकि वार्ड 14 को एससी (महिला) के लिए आरक्षित कर दिया गया है.
वार्डों की नई पहचान: एक नजर में बड़े बदलाव
अनारक्षित से आरक्षित की ओर: वार्ड 11 और 22 जो पहले महिलाओं के लिए अनारक्षित थे, अब अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I के लिए सुरक्षित कर दिए गए हैं.
ST से EBC में परिवर्तन: सबसे चौंकाने वाला बदलाव वार्ड 15 में दिखा है, जो 2018 में एसटी (अन्य) था, लेकिन 2025 में यह अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 (महिला) की झोली में चला गया है.
OBC-II के नए केंद्र: वार्ड 20, 26, 27 और 28 अब पिछड़ा वर्ग-II के उम्मीदवारों के लिए मुख्य रणक्षेत्र होंगे.
सामान्य (Open) हुई सीटें: वार्ड 4, 24, 29, 31, 32 और 41 अब पिछड़ा वर्ग या महिला आरक्षण से हटकर अनारक्षित (अन्य) की श्रेणी में आ गए हैं, जिससे यहां मुकाबला सबसे रोमांचक और 'ओपन' होने की उम्मीद है.
दिग्गजों की विदाई और नए चेहरों की एंट्री
आरक्षण ने यह साफ कर दिया है कि रांची नगर निगम में इस बार नए चेहरों की भरमार होगी. कई मौजूदा पार्षदों के वार्ड आरक्षित हो जाने के कारण उन्हें अब या तो अपनी सीट छोड़नी होगी या अपने परिवार की महिला सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारना होगा. अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए 9 सीटें आरक्षित होने से शहर की राजनीति में एक नया नेतृत्व उभरने के संकेत मिल रहे हैं.
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