Ranchi : केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के व्यवसाय प्रशासन विभाग एवं वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन का विषय “GST 2.0: Sectoral Analysis, Digital Compliance and Consumption Shifts – Implications for a Viksit Bharat” रहा. सम्मेलन के पहले दिन कर सुधार, डिजिटल अनुपालन और आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई.
उद्घाटन सत्र में XLRI, जमशेदपुर के प्रो. देबी प्रसाद बाल ने जीएसटी के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डालते हुए संतुलित कर प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अत्यधिक कराधान से उपभोग, निवेश और बचत प्रभावित होते हैं, जबकि संतुलित कर नीति आर्थिक विकास को गति देती है. उन्होंने “टैक्स ब्यूयेंसी” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए जीएसटी और आर्थिक वृद्धि के बीच संबंध को रेखांकित किया.
सेल (SAIL) के महाप्रबंधक (वित्त) सीए राजीव गुप्ता ने GST 2.0 के तहत हुए सुधारों की चर्चा करते हुए बताया कि कर दरों में कमी, कोल सेस की समाप्ति, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार और तेज रिफंड प्रक्रिया से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लाभ हुआ है. हालांकि, उन्होंने उच्च अनुपालन बोझ और HSD को जीएसटी के दायरे में शामिल न किए जाने को प्रमुख चुनौती बताया.
पैनल चर्चा में “डेमोंस्ट्रेशन इफेक्ट” के संदर्भ में लक्जरी वस्तुओं पर कर वृद्धि के सीमित प्रभाव पर विचार किया गया. साथ ही यह सवाल भी उठा कि क्या जीएसटी छोटे उद्यमियों की तुलना में बड़े उद्योगों को अधिक लाभ पहुंचा रहा है. विशेषज्ञों ने MSMEs को सशक्त बनाने और समावेशी विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई.
सीए राजेंद्र अरोड़ा ने अनौपचारिक क्षेत्र के व्यवसायों को पारदर्शी और नियमबद्ध प्रणाली अपनाने की सलाह दी, जबकि विवेक तिबड़ेवाल ने छोटे व्यापारियों के लिए सरल अनुपालन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया. चर्चा के दौरान इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर, कर दरों के असंतुलन और मूल्य निर्धारण जैसे मुद्दों पर भी विमर्श हुआ.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोग वृद्धि पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जीएसटी के बाद संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार अभी भी धीमी है. इसके पीछे गरीबी, आय असमानता और ग्रामीण चुनौतियां प्रमुख कारण बताए गए. साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर बल दिया गया.
दिन के अंत में आयोजित तकनीकी सत्र में देशभर के विभिन्न संस्थानों के शोधार्थियों और शिक्षकों ने डिजिटल उपभोक्ता व्यवहार, डेटा-आधारित कराधान, MSMEs पर प्रभाव और विकसित भारत 2047 में जीएसटी की भूमिका जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए.
सम्मेलन का सफल संचालन संयोजक डॉ. प्रणय पराशर एवं सह-संयोजक डॉ. नितेश भाटिया के नेतृत्व में हुआ. प्रो. बटेश्वर सिंह और प्रो. के.बी. सिंह के मार्गदर्शन में कार्यक्रम सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ. सम्मेलन का दूसरा दिन 20 मार्च 2026 को आयोजित होगा, जिसमें आगे की नीतिगत चर्चाएं और समापन सत्र होंगे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment