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Ranchi News: झारखंड में 65% श्रमिकों को नहीं मिल रहा न्यूनतम वेतन, SBI की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Ranchi: झारखंड में श्रम कानूनों के उल्लंघन और मजदूरों के आर्थिक शोषण को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नवीनतम रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां न्यूनतम मजदूरी के नियमों का सबसे अधिक उल्लंघन हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के करीब 65 प्रतिशत कैजुअल (अनियत) श्रमिकों को सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भी नसीब नहीं हो रही है.
 

Ranchi: झारखंड में श्रम कानूनों के उल्लंघन और मजदूरों के आर्थिक शोषण को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नवीनतम रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां न्यूनतम मजदूरी के नियमों का सबसे अधिक उल्लंघन हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के करीब 65 प्रतिशत कैजुअल (अनियत) श्रमिकों को सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भी नसीब नहीं हो रही है.

 

एसबीआई की यह रिपोर्ट 'पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे' (PLFS) 2025 के आंकड़ों पर आधारित है. आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बाद झारखंड देश का तीसरा ऐसा राज्य है, जहां न्यूनतम मजदूरी में सबसे अधिक असमानता दर्ज की गई है. छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और ओडिशा में 66 प्रतिशत है.

 

महिलाओं की स्थिति और भी गंभीर


रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बुरा असर महिला श्रमिकों पर पड़ रहा है. आंकड़ों के अनुसार, कम वेतन पाने वाले श्रमिकों में 45 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि कुल वर्कफोर्स में उनकी भागीदारी मात्र 25 प्रतिशत है. इसके विपरीत  पुरुष श्रमिकों की भागीदारी 75 प्रतिशत है, लेकिन कम वेतन पाने वालों में उनका हिस्सा 55 प्रतिशत है. 

 

कानून के बावजूद सुरक्षा का अभाव


रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि झारखंड जैसे राज्यों में कैजुअल लेबर का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी वित्तीय सुरक्षा के काम कर रहा है. कानूनन जो मजदूरी दर तय की गई है, वह धरातल पर लागू नहीं हो पा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और असंगठित क्षेत्र में निगरानी की कमी इस शोषण का मुख्य कारण है.

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