Ranchi : भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सरकार के 99 हजार करोड़ रुपये के निवेश के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार नई उपलब्धि दिखाने के लिए पुराने एमओयू को दोबारा पेश कर रही है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में आयोजित स्टेक होल्डर्स कॉन्फ्रेंस में जिन निवेश प्रस्तावों को नया बताया गया, उनमें से अधिकांश समझौते 6 से 7 महीने पहले मुख्यमंत्री की दावोस यात्रा के दौरान ही हो चुके थे.
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प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सरकार निवेश के नाम पर केवल रीपैकेजिंग कर रही है. उनका आरोप था कि दावोस में जिन कंपनियों के साथ एमओयू हुए थे, उन्हीं फाइलों का दिल्ली में फिर से आदान-प्रदान कर इसे नई उपलब्धि के रूप में पेश किया गया. उन्होंने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है.

बैठक करते प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में घोषित 99 हजार करोड़ रुपये के निवेश में करीब 80 प्रतिशत एमओयू पहले ही दावोस में हो चुके थे. इनमें टाटा स्टील की हिसारना टेक्नोलॉजी और टिनप्लेट विस्तार परियोजना के तहत क्रमशः 7600 करोड़ और 2600 करोड़ रुपये का निवेश, रुंगटा संस का 10 हजार करोड़ रुपये, रुंगटा माइंस का 3000 करोड़ रुपये, जिंदल स्टील का 400 करोड़ रुपये, अंबूजा सीमेंट का 1000 करोड़ रुपये और अमरगन स्टील एंड पावर प्लांट का 4980 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है.
जिंदल न्यूक्लियर पावर प्लांट की घोषणा पर भी प्रतुल शाहदेव ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 300 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव को सीधे निवेश के रूप में 99 हजार करोड़ रुपये में जोड़ना सही नहीं है. इसे केवल निवेश की इच्छा यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटेंट के रूप में बताया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि देश में निजी क्षेत्र का एक भी न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं है. परमाणु ऊर्जा पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है. ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट के लिए एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड, जल संसाधन मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय सहित कई स्तरों से अनुमति लेनी पड़ती है. इसके अलावा भूमि चयन, भूकंपीय अध्ययन, जल उपलब्धता और पर्यावरणीय मंजूरी जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. उन्होंने सवाल किया कि इन सभी जरूरी प्रक्रियाओं के बिना सरकार ने इसे पक्का निवेश कैसे मान लिया.
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जिंदल समूह का स्टील और पावर सेक्टर में अच्छा अनुभव है, लेकिन न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने के लिए जरूरी तकनीकी विशेषज्ञता उनके पास नहीं है. उन्होंने पूछा कि यदि विदेशी तकनीक पर भी कई तरह की पाबंदियां हैं, तो यह परियोजना किस आधार पर आगे बढ़ेगी.
प्रेसवार्ता में उन्होंने सरकार से वोल्वो इलेक्ट्रिक बस परियोजना का भी हिसाब मांगा. उन्होंने कहा कि पिछली बार मुख्यमंत्री ने जिस वोल्वो इलेक्ट्रिक बस परियोजना का प्रचार किया था और खुद बस में यात्रा भी की थी, उसका अब कोई जिक्र नहीं हो रहा है. उन्होंने पूछा कि उस परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है.
बीजेपी ने सरकार से दावोस से लेकर दिल्ली तक किए गए सभी निवेश समझौतों की रियलिटी चेक रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की. प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सरकार बताए कि पिछले छह महीनों में कितने एमओयू जमीन पर उतरे, कितने उद्योगों का निर्माण शुरू हुआ और इन परियोजनाओं से राज्य के स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार मिले.
उन्होंने कहा कि बीजेपी औद्योगिक विकास, स्थानीय आदिवासियों और मूलवासियों के हित और रोजगार सृजन के पक्ष में है. यदि राज्य में वास्तविक निवेश आता है तो पार्टी उसका स्वागत करेगी और सरकार का सहयोग भी करेगी. लेकिन विपक्ष होने के नाते सरकार के दावों की सच्चाई सामने लाना भी उसकी जिम्मेदारी है. उन्होंने सरकार से कहा कि वह हवा-हवाई घोषणाओं के बजाय जमीन पर काम दिखाए और जनता को भ्रमित करना बंद करे.
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