Ranchi : जीईएल चर्च, हेथा कोटा में प्रथम चार पुरखाओं का बपतिस्मा दिवस मनाया गया. इसको लेकर विश्वासियों में काफी उत्साह देखा गया. इस मौके पर बड़ी संख्या में कलीसिया के सदस्य, मण्डली के भाई-बहन शामिल हुए. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मॉडरेटर मार्शल केरकेट्टा ने कहा कि 9 जून 1852 को पहली बार चार उरांव भाईयों ने पहली बार बपतिस्मा लिए थे. उस समय बपतिस्मा ग्रहण करना आसान नहीं था, लेकिन चारों पुरखाओं ने साहस और विश्वास के साथ इस मार्ग को अपनाया. जिसमें परमेश्वर ने इन चार उरांव भाईयों को प्रेम किए.
उस दौर में आदिवासियों का शोषण किया जाता था. परंतु यह परमेश्वर की योजना रही और इन्होंने यीशु को पहचाना और उसे प्रभु यीशु के उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया. उनके त्याग और समर्पण ने समाज को नई दिशा दी है. समारोह के दौरान पत्रिका का भी विमोचन किया गया, जिसमें चर्च के इतिहास और पुरखाओं के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है.
इस मौके पर बिशप सीमांतल संदीप तिर्की, बिशप जॉनसन लकड़ा, कलिसिया महासचिव ईश्वर दत् कंडुलना, पादरी ओनोल कुल्लु, पादरी निरल बागे, पादरी अमीत लकड़ा, पादरी युनायन कडुंलना, श्रीएसएन बारला, श्रीअटलइराज खेस, सुलेमान कंडुलना समेत अन्य शामिल थे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment