Ranchi : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषा को शामिल नहीं किए जाने को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. छात्र नेता राहुल कुमार क्रांति ने सरकार पर पलामू, गोड्डा समेत इन भाषाओं को बोलने वाले क्षेत्रों के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है.
भाषा विवाद के समाधान के लिए गठित पांच सदस्यीय समन्वय समिति की हालिया बैठक भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी. राहुल क्रांति ने कहा कि JTET आवेदन की अंतिम तिथि 21 मई तय है, जबकि समिति की अगली बैठकें उसके बाद प्रस्तावित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम तिथि के बाद निर्णय लेने का कोई औचित्य नहीं है और सरकार जानबूझकर अभ्यर्थियों को परीक्षा से बाहर रखना चाहती है.
उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जा चुका है और अब झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है. उनका कहना है कि भाषा के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी के साथ भेदभाव संविधान के खिलाफ है.
राहुल क्रांति ने JTET की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की भी मांग उठाई. उन्होंने कहा कि NCTE के दिशा-निर्देश और CTET की तर्ज पर यह बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि 18 से 20 वर्ष के प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल सके.
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की पर भी मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषियों के अपमान का आरोप लगाया. साथ ही चेतावनी दी कि यदि इन भाषाओं को बोलने वालों को बाहरी माना जाता है, तो अलग राज्य की मांग को लेकर केंद्र सरकार से मुलाकात की जाएगी.
इसके अलावा, छात्र नेता ने 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ही विज्ञापन के तहत कई चरणों में नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं, जिसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए.
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