Ranchi News: रिम्स में मरीजों के इलाज और मेडिकल पढ़ाई को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इसी सिलसिले में रिम्स के निदेशक प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा ने अपनी टीम के साथ Digi Health Conclave में हिस्सा लिया. यहां उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक सर्जरी और डिजिटल हेल्थ से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी ली.
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कॉन्क्लेव में रिम्स की टीम ने अलग-अलग कंपनियों के स्टॉल का दौरा किया और वहां दिखाई गई तकनीकों को समझा. टीम ने यह भी जाना कि इन तकनीकों का इस्तेमाल रिम्स में मरीजों के इलाज, अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल शिक्षा में किस तरह किया जा सकता है.
कार्यक्रम में Human Resources Information System (HRIS) आधारित तकनीक की जानकारी ली गई. इसके जरिए डॉक्टरों और संस्थान के कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रखा जा सकता है.
डिजिटल हेल्थ कियोस्क भी टीम के लिए खास रहे. इनकी मदद से मरीजों की पल्स, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल और ब्लड ग्लूकोज की जांच के साथ कुछ जरूरी खून की जांचों का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से रखा जा सकता है. इनमें लिवर और किडनी की जांच से जुड़ी जानकारी भी शामिल है.
रोबोटिक सर्जरी की तकनीक में भी निदेशक ने रुचि दिखाई. SS Innovations की ओर से दिखाए गए मोबाइल ऑपरेशन थिएटर मॉडल को देखने के साथ उन्होंने रोबोटिक सर्जिकल आर्म की कार्यप्रणाली को भी समझा. इस दौरान रोबोटिक सर्जरी के प्रशिक्षण और आधुनिक ऑपरेशन में इसके संभावित इस्तेमाल की जानकारी ली गई.
इसके अलावा, टीम ने Audiology Assessment Device का परीक्षण किया. यह उपकरण सुनने की क्षमता से जुड़ी जांच में इस्तेमाल किया जाता है. मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए दिखाई गई Digital Dissection Table को भी देखा गया. इसकी मदद से छात्र मानव शरीर की बनावट को तीन आयामों में समझ सकते हैं. इससे शरीर रचना विज्ञान की पढ़ाई को अधिक आसान और व्यावहारिक बनाने में मदद मिल सकती है.
कॉन्क्लेव में अस्पताल प्रबंधन प्रणाली (HMIS) और AI आधारित डिजिटल हेल्थ सेवाओं पर भी चर्चा हुई. इन तकनीकों के जरिए मरीजों का रिकॉर्ड रखने, अस्पताल की व्यवस्था सुधारने और इलाज से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने की संभावनाओं को समझा गया.
रिम्स निदेशक प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा ने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही इस्तेमाल अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने में मदद कर सकता है. इससे स्वास्थ्य सेवाओं को आसान, पारदर्शी और मरीजों की जरूरत के अनुसार बनाने में सहायता मिल सकती है. हालांकि, रिम्स में इन तकनीकों को लागू करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
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