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Ranchi News : खरीफ अनुसंधान परिषद की बैठक में आवश्यकता आधारित शोध पर जोर

Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में खरीफ अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर आवश्यकता आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और अंतर विभागीय एवं अंतर-सांस्थानिक सहयोगात्मक शोध प्रस्ताव विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि इससे विभिन्न संस्थानों की विशेषज्ञता और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग राज्य और किसानों के हित में किया जा सकेगा.
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Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में खरीफ अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर आवश्यकता आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और अंतर विभागीय एवं अंतर-सांस्थानिक सहयोगात्मक शोध प्रस्ताव विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि इससे विभिन्न संस्थानों की विशेषज्ञता और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग राज्य और किसानों के हित में किया जा सकेगा.

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बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने युवा वैज्ञानिकों से नियमित कार्यों के साथ-साथ नवोन्मेषी शोध पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक वैज्ञानिक को एक-दो बाह्य पोषित शोध परियोजनाएं लाने का प्रयास करना चाहिए तथा शोध प्रस्ताव तैयार करते समय विभाग के निर्धारित उद्देश्यों का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने पशु-पक्षी प्रक्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन एवं रखरखाव पर भी बल दिया.


बैठक में बाह्य विशेषज्ञ के रूप में शामिल आईसीएआर के अवकाशप्राप्त सहायक महानिदेशक (पशु उत्पादन एवं प्रजनन) डॉ. वी.के. सक्सेना ने कहा कि शोध केवल अकादमिक उद्देश्य तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके परिणाम सीमित संसाधनों वाले किसानों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में भी उपयोगी और लागू होने चाहिए. उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य उत्पादन लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना होना चाहिए.


डॉ. सक्सेना ने देशी मुर्गी नस्लों के चिह्नीकरण, गुण निर्धारण और पंजीकरण के साथ उनके बेहतर प्रबंधन एवं पोषण संबंधी तकनीकों के विकास पर जोर दिया. वहीं, बकरियों से बेहतर मांस और दूध उत्पादन के लिए सिरोही और पलामू नस्ल के संकरण पर शोध करने का सुझाव भी दिया.


बैठक में वानिकी संकाय के प्रो. कौशल कुमार एवं पशु गर्भ विज्ञान विभाग के प्रो. संजय कुमार रवि सहित पशु चिकित्सा एवं वानिकी संकाय के विभागाध्यक्षों ने अपनी शोध उपलब्धियां प्रस्तुत कीं.


इस अवसर पर बीएयू के पूर्व कुलपति डॉ. जी.एस. दुबे, पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ. डी.के. सिंह द्रोण तथा अवकाशप्राप्त डीन डॉ. बी.के. राय ने शोध कार्यों को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने के लिए अपने सुझाव दिए. बैठक का समन्वयन अनुसंधान निदेशक डॉ. पी.के. सिंह ने किया.

 

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