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Ranchi News : दो पीढ़ियों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे एक परिवार के पांच सदस्यों ने की घर वापसी

दो पीढ़ियों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे एक परिवार के पांच सदस्यों ने गुरुवार को सरना धर्म में घर वापसी की. इस दौरान राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के तत्वावधान में हरमु देशावली में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया.
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Ranchi : दो पीढ़ियों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे एक परिवार के पांच सदस्यों ने गुरुवार को सरना धर्म में घर वापसी की. इस दौरान राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के तत्वावधान में हरमु देशावली में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया. 


तीन जोड़ियों का आदिवासी परंपरा के अनुसार सामूहिक विवाह भी कराया गया.घर वापसी करने वालों में बबलु प्रकाश कुजूर, उनकी पत्नी निभा कुजूर तथा उनके परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं. बबलु प्रकाश कुजूर मूल रूप से लोहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड के कड़ाक गांव के निवासी हैं और वर्तमान में हरमू में रहते हैं.

 

उन्होंने बताया कि उनके दादा-परदादा सरना धर्म के अनुयायी थे, लेकिन परिवार बाद में ईसाई धर्म से जुड़ गया था. पिछले 12 वर्षों पूर्व उनका विवाह चर्च में हुआ था और परिवार के सदस्य ईसाई रीति-रिवाजों का पालन करते थे.

 

बबलु प्रकाश ने बताया कि परिवार में होने वाले सभी धार्मिक अनुष्ठान बाइबिल के अनुसार किए जाते थे. उनके तीन पुत्र प्रत्युष कुजूर, निखिल कुजूर और अर्पित कुजूर भी हमेशा चर्च जाते थे.ईसाई पर्व-त्योहारों में शामिल होते थे.

 

प्रत्येक रविवार को चर्च भी जाते थे.इस दौरान उन्होंने कहा कि समय के साथ उन्हें अपने मूल धर्म और परंपराओं की ओर लौटने की प्रेरणा मिली, जिसके बाद परिवार ने सरना धर्म में वापसी का निर्णय लिया.धर्म वापसी के दौरान पारंपरिक रीति से तांबे के पैसे, तुलसी और दूब घास मिश्रित जल का सेवन कराया गया. इसके बाद सरना प्रार्थना सभा आयोजित हुई और आदिवासी परंपरा से विवाह संस्कार संपन्न कराया गया. 

 

अखड़ा में सफेद मुर्गे की बलि दी गई तथा धूप-धुवन और अरवा चावल का प्रसाद ग्रहण किया गया.राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश अध्यक्ष रवि तिग्गा ने बताया कि एक परिवार के पांच सदस्यों की घर वापसी कराई गई है और तीन जोडो का सामूहिक विवाह आदिवासी रीति-रिवाज से संपन्न हुआ.

 

निभा कुजूर ने बताया कि परिवार मजदूरी कर जीवनयापन करता है. वहीं बबलु प्रकाश कुजूर ने कहा कि उनके तीन बहन और दो भाई पहले ही सरना धर्म में वापसी कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि अब पूरा परिवार अपने पूर्वजों की परंपराओं और रूढ़ीवादी प्रधा के अनुरूप जीवन व्चापन करना चाहता है.

 

 

 

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