Ranchi News: रांची विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की कला, संस्कृति और रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल प्रस्तावित की गई हैं. बेसिक साइंस कैंपस, मोरहाबादी स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में बोर्ड ऑफ स्टूडेंट आर्ट एंड कल्चर की पहली बैठक कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में हुई. बैठक में विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विद्यार्थी क्लबों, स्टार्ट-अप, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई.
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बैठक में डीएसडब्ल्यू प्रो. सुदेश साहू, कुलसचिव डॉ. राजकुमार शर्मा, निदेशक एस्टेट एंड फैसिलिटीज मैनेजमेंट विकास कुमार, वित्त पदाधिकारी डॉ. दिलीप प्रसाद और पीआरओ डॉ. स्मृति सिंह उपस्थित थे. एडवाइजरी सदस्य के रूप में संगीत नाटक अकादमी अवार्डी डॉ. अजय कुमार मलकानी तथा रंगकर्मी और संत जेवियर कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कमल बोस शामिल हुए. बैठक का संचालन निदेशक, स्टूडेंट आर्ट एंड कल्चर, डॉ. आनंद कुमार ठाकुर ने किया. उन्होंने वर्ष 2026-27 के सांस्कृतिक कैलेंडर और प्रस्तावित बजट का प्रेजेंटेशन दिया.
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि झारखंड कला और संस्कृति का जीवंत केंद्र है. रांची विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रयास करेगा.
बैठक में विश्वविद्यालय के लिए वार्षिक कला एवं संस्कृति कैलेंडर तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया. इसमें कार्यशालाएं, सांस्कृतिक महोत्सव, साहित्यिक कार्यक्रम, संगीत, नाटक, ललित कला, कला एवं शिल्प, रेडियो एवं मीडिया गतिविधियां, क्विज और वाद-विवाद सहित अन्य कार्यक्रम शामिल होंगे. कैलेंडर में स्वामी विवेकानंद दिवस (युवा विचार) को शामिल करने का सुझाव भी दिया गया.
विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के लिए विभिन्न आर्ट एंड कल्चर क्लब गठित करने का प्रस्ताव रखा गया. प्रत्येक क्लब में शिक्षक समन्वयक और विद्यार्थी प्रतिनिधि होंगे तथा क्लब अपना वार्षिक कार्यक्रम तैयार करेंगे. इनके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतिभा प्रदर्शन, प्रशिक्षण और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा.
बैठक में आर्ट एंड कल्चर स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन की दिशा में पहल करने पर भी चर्चा हुई. इसके तहत विद्यार्थियों, कलाकारों और पारंपरिक कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, बाजार से जुड़ने, प्रदर्शनी, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है.
विशेषज्ञ प्रशिक्षण के लिए आवश्यकता के अनुसार बाहरी कलाकारों, प्रशिक्षकों और संगीत संगतकारों की सेवाएं लेने की अनुशंसा की गई. इसके लिए विश्वविद्यालय के निर्धारित वित्तीय नियमों और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का पालन किया जाएगा.
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर Student Art & Culture का अलग वेब पोर्टल या पेज विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया. इसमें विद्यार्थियों की उपलब्धियां, कार्यक्रम, सांस्कृतिक क्लब, फोटो, वीडियो और अन्य गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी.
बैठक में देश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. इसके माध्यम से कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कलाकारों से संवाद और प्रशिक्षण आयोजित किए जा सकेंगे.
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों और महोत्सवों से संबंधित प्रस्तावित बजट को सक्षम प्राधिकारी के विचार एवं अनुमोदन के लिए अनुशंसित किया गया. साथ ही बोर्ड ऑफ स्टूडेंट आर्ट एंड कल्चर की बैठक प्रत्येक तीन महीने में आयोजित करने की अनुशंसा की गई, ताकि कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा और विद्यार्थियों की भागीदारी का आकलन किया जा सके.
समिति ने कला एवं संस्कृति गतिविधियों को समावेशी, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित रखने पर जोर दिया. झारखंड की जनजातीय, लोक एवं पारंपरिक कला-संस्कृति को विशेष मंच देने के साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई. समिति के अनुसार, इन पहलों से विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति, कौशल विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उद्यमिता के नए अवसर मिल सकेंगे.
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