- पुरखौती जमीन बचाने के लिए सीओ से लेकर डीसी तक लगा चुके हैं गुहार
- 15 साल से जमीन के लड़ रहे हैं लड़ाई
Ranchi News : ऐतिहासिक मुड़मा जतरा में जमीन विवाद का मामला गहराता जा रहा है. मामला पूर्व आर्मी की 1.80 डिसमिल पुरखौती जमीन से जुड़ा है. रैयत बिरसा उरांव ने धर्मगुरु बंधन तिग्गा पर मुड़मा जतरा के नाम पर आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया.
इसे भी पढ़ें...
बिरसा उरांव ने आरोप लगाया कि यह उनकी पुरखौती जमीन है. जमीन पर घर बनाना जरूरी है. लेकिन धर्म गुरू बंधन तिग्गा मुड़मा जतरा की जमीन बताकर रोक रहे है, जो बिल्कुल गलत है. आज तक मुड़मा जतरा की जमीन सीमांकन नहीं कराए गए है. यह जमीन मुड़मा जतरा से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.
उन्होंने कहा कि अपनी जमीन को बचाने के लिए कोर्ट कचहरी भी किए है. पक्ष भी सुनाया गया है. इसके अलावा डीसी, एलआरडीसी और अंचल अधिकारी (सीओ) तक को आवेदन दे चुके हैं. इसके अलावा जमीन से संबंधित विवाद को सुलझाने के लिए राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा मुड़मा में भी आवेदन दिए गए हैं, लेकिन यहां से भी विवाद नहीं सुलझ सका है.
बिरसा उरांव ने बताया जब भी घर का काम शुरू करते है उस दौरान बंधन तिग्गा लोगों को बुलाकर मारपीट करते है. घर बनाने के लिए दीवार खड़ा करते है. अपने समर्थकों को बुलाकर तोड़ देते है.
15 साल से जमीन के बदले जमीन देने का आश्वासन
बिरसा उरांव ने जमीन के एवज में जमीन की मांग की है. बंधन तिग्गा 15 सालों से आश्वासन दे रहे है. लंबे समय के बाद भी जमीन नहीं मिली है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंधन तिग्गा आदिवासी समाज को ठग रहे है. जमीन की लड़ाई लड़ते-लड़ते भैया मंगा उरांव और भाभी सीमा देवी का सदमा में देहांत हो चुका है. जमीन के लिए आर्मी की नौकरी से इस्तीफा देना पड़ गया. आज भी जमीन बचाने की कवायद चल रही है.
जाने क्या कहा बंधन तिग्गा ने
धर्म गुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि मुड़मा जतरा लगाने के लिए गैर आदिवासियों ने भी अपनी जमीन छोड़ी है. मुड़मा जतरा के लिए करीब 65 एकड़ से अधिक जमीन है. सभी धर्मों के लोग मुड़मा जतरा लगा रहे है. यह मुंडा और उरांव समाज का प्रमुख जतरा है. यहां देश-विदेश के लोग भी पहुंचते है. बिरसा उरांव एक आदिवासी समाज से है. ये जमीन नहीं छोड़ेंगे. तो कौन छोड़ेंगे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

