Ranchi: राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 9वीं बटालियन के डिप्टी कमांडर विनय कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन को लेकर तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कमांडेंट एच.पी.एस. कंडारी के नेतृत्व में 9वीं बटालियन, बिहटा की तीन विशेष रेस्क्यू टीमें किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

डिप्टी कमांडर ने बताया कि NDRF के जवान केवल मानसून ही नहीं, बल्कि CSSR (Collapsed Structure Search and Rescue) और CBRN (Chemical, Biological, Radiological and Nuclear) जैसी जटिल आपदाओं से निपटने का भी नियमित प्रशिक्षण लेते हैं. किसी भी आपात सूचना पर टीम 20 मिनट के भीतर अपने बेस से रवाना होने के लिए तैयार रहती है. सभी रेस्क्यू वाहन और आवश्यक उपकरण हमेशा रेडी मोड में रखे जाते हैं. उन्होंने कहा कि रामगढ़, देवघर और जमशेदपुर जैसे दूरस्थ इलाकों तक पहुंचने में दूरी के कारण 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है, लेकिन टीम हर स्थिति में राहत कार्य के लिए तत्पर रहती है.
इसे भी पढ़ें:
उन्होंने ये भी बताया कि बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है. कुएं या गहरे पानी में उतरने से पहले मीथेन जैसी जहरीली गैसों की जांच गैस मॉनिटर से की जाती है. वहीं, जर्जर इमारतों के ढहने की स्थिति में मलबे में फंसे लोगों को खोजने के लिए VLC और लाइफ डिटेक्टर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है.
डिप्टी कमांडर विनय कुमार ने स्पष्ट किया कि जर्जर भवनों को चिह्नित कर खाली कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है, जबकि NDRF का कार्य दुर्घटना होने पर त्वरित राहत एवं बचाव अभियान चलाकर लोगों की जान बचाना है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आम लोगों से अपील की कि बारिश के मौसम में नदी-नालों, तालाबों और अन्य जल निकायों से दूर रहें. तेज बहाव वाले पानी, जलभराव और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment