Ranchi News : विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आज रांची समेत देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया गया. पीपल्स अगेंस्ट एसआईआर के साझा बैनर तले छात्र, युवा, महिलाएं और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन कर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए.
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के साथ कथित पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रद्द करने की मांग की.प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे छात्रों, महिलाओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने लाठीचार्ज किया.
आरोप है कि इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए, कुछ को गंभीर चोटें आईं और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों को दिल्ली से दूर ले जाकर छोड़ा गया.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत देशभर में करीब 13 करोड़ 30 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं. उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई.
उनका कहना था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े.प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि चुनाव आयोग को किसी भी राजनीतिक दल या कॉरपोरेट समूह के प्रभाव से मुक्त रहकर संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए.
AISA की कार्यकर्ता सुहानी मेहता ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है.
झारखंड जनाधिकार महासभा की अपूर्वा ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश से आंदोलन कमजोर नहीं होगा, बल्कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों में और व्यापक रूप लेगा. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी.
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के हरीश अहवा ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, एसआईआर प्रक्रिया रद्द नहीं होती और चुनाव आयोग के लोकतंत्रीकरण की दिशा में कदम नहीं उठाए जाते, तब तक विभिन्न संगठन संयुक्त रूप से आंदोलन जारी रखेंगे.
सामाजिक कार्यकर्ता रतन ने मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.3 करोड़ नामों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संबंध में स्पष्ट जानकारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए.प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र का बुनियादी अधिकार है और इसकी रक्षा के लिए उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.

