Ranchi : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान प्रबंधन (RIMS) ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रही खबरों पर अपना पक्ष रखा है. प्रबंधन ने कहा है कि संस्थान में सभी खरीद प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत की जाती हैं.
रिम्स प्रबंधन के अनुसार, सभी प्रोक्योरमेंट Jharkhand Procurement Policy 2014 और Jharkhand Procurement of Goods and Services Manual 2024 के प्रावधानों के अनुसार GeM पोर्टल या झारखंड e-Procurement पोर्टल के माध्यम से की जाती हैं. किसी भी टेंडर से पहले सक्षम स्तर से मंजूरी ली जाती है और Departmental Purchase Committee द्वारा स्पेसिफिकेशन तैयार किए जाते हैं, जिनकी समीक्षा Pre Purchase Committee करती है.
प्रबंधन ने बताया कि हर निविदा में प्री-बिड बैठक आयोजित की जाती है, जिसमें इच्छुक कंपनियों से सुझाव लिए जाते हैं और उसी आधार पर अंतिम टेंडर दस्तावेज तैयार होता है. टेंडर प्रक्रिया का निष्पादन रिम्स विनियमावली 2014 के तहत गठित स्थायी भंडार एवं क्रय समिति द्वारा किया जाता है.
इस समिति की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक करते हैं और इसमें चिकित्सा अधीक्षक, स्वास्थ्य, निगरानी और उद्योग विभाग के नामित सदस्य, निदेशक चिकित्सा शिक्षा, आंतरिक वित्तीय सलाहकार और शासी परिषद के एक चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होते हैं. बैठक में Pre Purchase Committee के अध्यक्ष और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति भी अनिवार्य होती है.
रिम्स प्रबंधन ने यह भी कहा कि सभी बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर सुरक्षित रखी जाती है. साथ ही मीडिया में जिन कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें से कोई भी कंपनी वर्तमान में रिम्स में सप्लायर या सेवा प्रदाता के रूप में कार्य नहीं कर रही है.
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