- -न्यायिक समिति ने 24.04.2026 के चीफ रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को सही ठहराया
- -महेश तिवारी ने स्टेट बार काउंसिल चुनाव में उम्मीदवारी रद्द करने को लेकर चीफ रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को दी थी चुनौती
Ranchi: वरीय अधिवक्ता सिद्धार्थ मृदुल (सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस मणिपुर) की चेयरमैनशिप वाली तीन सदस्यी हाई पावर इलेक्शन कमेटी से वकील महेश तिवारी को झटका लगा है. झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में उम्मीदवारी रद्द करने से संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ के आदेश को चुनौती देने वाली वकील महेश तिवारी की अपील न्यायिक समिति ने खारिज कर दी है.
न्यायिक समिति ने माना कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को उम्मीदवार की अयोग्यता तय करने का अधिकार था, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी और परिणाम प्रकाशित नहीं हुए थे. समिति ने 24.04.2026 के चीफ रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को सही ठहराया.
आदेश में कहा गया कि अपीलकर्ता 30.03.2026 को आपराधिक न्यायालय से दोषसिद्ध होने के कारण अयोग्य हो गया था. इसलिए उसे झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव 2026 में निर्वाचित प्रत्याशी घोषित नहीं किया जा सकता था. अपील खारिज कर दी गई. साथ ही चीफ रिटर्निंग ऑफिसर (CRO ) को कानून के अनुसार आगे की चुनावी कार्रवाई करने की अनुमति दी गई.
दरअसल, झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव से जुड़े विवाद पर वकील महेश तिवारी की अपील की हाई पावर इलेक्शन कमिटी में सुनवाई हुई. अपीलकर्ता महेश तिवारी ने 24.04.2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसे मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने पारित किया था. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अपने आदेश में महेश तिवारी का चुनाव रद्द कर दिया था और किसी दूसरे प्रत्याशी जिन्होंने उक्त चुनाव में निर्धारित कोटा पूरा किया था, उन्हें झारखंड स्टेट बार काउंसिल का निर्वाचित सदस्य घोषित किया था.
महेश तिवारी ने दावा किया था कि वे 40 वर्षों से अधिवक्ता हैं तथा 2007 से 2026 तक लगातार तीन कार्यकाल तक झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य रहे हैं. चुनाव कार्यक्रम 05.01.2026 को घोषित हुआ था और मतदान 12.03.2026 को होना तय था. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 10.02.2026 थी तथा नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 11.02.2026 थी.
अपीलकर्ता महेश तिवारी ने 10.02.2026 को नामांकन दाखिल किया था, जिसे जांच (scrutiny) के बाद स्वीकार कर 18.02.2026 को प्रकाशित भी कर दिया गया था. यहां बता दें कि वकील महेश तिवारी को रांची सिविल कोर्ट से महिला अधिवक्ता रितु कुमार के साथ मारपीट सहित अन्य मामले में दोषी कर देते हुए 2 साल की सजा सुनाई गई है.
हाई पावर इलेक्शन कमिटी में चेयरमैन अधिवक्ता सिद्धार्थ मृदुल के अलावा वरीय अधिवक्ता आरपी भट्ट एवं वरीय अधिवक्ता अनुपम लाल दास सदस्य के रूप में शामिल रहे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए पर्यवेक्षक बनाया था.
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