Search

 
 
 

Ranchi News : टाना भगत मूलभूत सुविधाओं से वंचित, नहीं मिला आवास

Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय भाषा विभाग के सामने पिछले 60-70 वर्षों से करीब 20-25 परिवार रह रहे है. सभी कच्चा मकान में जीवन व्यतीत कर रहे है. इन्हें आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है. सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. शहर के बीच में आज भी मिट्टी के मकानों में रहने के लिए विवश है. बिगा टाना भगत ने बताया कि 1960 में रांची कॉलेज की स्थापना हुई थी.
 

Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय भाषा विभाग के सामने पिछले 60-70 वर्षों से करीब 20-25 परिवार रह रहे है. सभी कच्चा मकान में जीवन व्यतीत कर रहे है. इन्हें आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है. सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. शहर के बीच में आज भी मिट्टी के मकानों में रहने के लिए विवश है. बिगा टाना भगत ने बताया कि 1960 में रांची कॉलेज की स्थापना हुई थी.

 

इसके बाद से इस क्षेत्र में रह रहे हैं. आज करीब 70-80 वर्ष की उम्र हो रही है. लेकिन आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है. नगर निगम में इसके लिए कई बार आवेदन दिए है, बावजूद आज तक पक्का मकान के लाभ से वंचित है. इसके साथ ही पीने की पानी की भी कोई सुविधा नहीं है. मजबूरी में रांची कॉलेज परिसर से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाते है.

Uploaded Image

नगर निगम ने टाना भगतो के लिए शौचालय की व्यवस्था की है लेकिन पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. इसकी वजह से नगर निगम के शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. बारिश होने पर पूरे इलाके में जलजमाव हो जाता है, जिससे लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

 

बिगा टाना भगत ने बताया कि नहाने और घरेलू उपयोग के लिए आज भी पुराने कुएं का उपयोग में लाते है. कपड़े धोने समेत अन्य कार्य भी इसी कुआं के माध्यम से किए जाते हैं. टाना भगत समुदाय की समस्याओं को लेकर न तो कोई आदिवासी विधायक आगे आया है और न ही सांसद ने उनकी सुध ली है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही