- मां-पिता ठेले पर चाय बेचते रहे, बेटा किताबों में भविष्य संवारता रहा
Ranchi News : रातु पार्क के सामने रहने वाले 23 वर्षीय आशीष मिश्रा सहायक कमांडेट बन कर देश सेवा करेगा. मां उषा देवी और पिता प्रकाश मिश्रा चाय का ठेला लगाकर परिवार चलाते हैं. सुबह जब ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत करते हैं, उससे पहले ही उनका संघर्ष शुरू हो जाता है.
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परिवार की आर्थिक स्थिति भले ही सीमित थी, लेकिन बेटे की पढ़ाई और भविष्य को लेकर उनके सपने बड़े थे. पिता ने कभी हालात को आशीष की पढ़ाई के बीच नहीं आने दिया.
पहला प्रयास रहा अधूरा, दूसरे प्रयास में मिली मंजिल
आशिष मिश्रा ने बताया कि घर से परीक्षा की तैयारी करना शुरू किए थे. पहले भी परीक्षा दिए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली. आशीष ने बताया कि जब सफलता नहीं मिली इस दौरान तैयारी की कमी के बारे में सोचते रहे और जो सवाल परीक्षा में पूछे गए थे, इन सभी प्रश्नों का जवाब ढूंढने के लिए किताबें पढ़ना शुरू कर किया. इसके बाद ही नए जोश के साथ दोबारा तैयारी में जुट गए.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में करीब एक साल दिल्ली में रहकर पढ़ाई की. वहां भी हालात आसान नहीं थे. वहां भी सीमित संसाधन थे. बावजूद हिम्मत नहीं हारी और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर UPSC CAPF 2025 के परिणाम में ऑल इंडिया 236वीं रैंक हासिल कर लिया.
शिशु मंदिर से शुरू हुआ सफर, अब देश सेवा की मंजिल
आशीष ने बताया कि रातु के शिशु मंदिर से दसवीं तक की पढ़ाई की. इसके बाद सेंट जेवियर कॉलेज से इंटरमीडिएट किये. श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय से बीएससी केमिस्ट्री ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का फैसला लिया. इसके बाद वे लगातार मेहनत करते रहे. पहली कोशिश में असफलता मिली, लेकिन पहली परीक्षा से सीख ली और दूसरी कोशिश में बेहतर करने के लिए किताबों का सहारा लिया और सिलेबस के साथ परीक्षा की पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़े.
रिजल्ट आने के बाद मां उषा देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े. पिता प्रेम प्रकाश मिश्रा ने बेटे पर गर्व करते हुए कहा कि आज बेटे की सफलता नहीं है बल्कि सालों की मेहनत, समर्पण और त्याग का नतीजा है. सुबह 3 बजे उठकर चाय का ठेला लगाया, ग्राहकों को चाय पिलाई और दिनभर मेहनत की. आज कम उम्र में बेटे ने देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल की है.
बधाइयों का तांता, हर कोई कर रहा संघर्ष को सलाम
आशीष की सफलता की खबर फैलते ही परिवार और परिचितों में खुशी का माहौल बना हुआ है. हर दिन आशिष को बधाई देने के लिए घर पहुंच रहे हैं. आशीष ने बताया कि सफलता का श्रेय माता-पिता को देते है. मुश्किल हालात में भी उन्होंने साथ नहीं छोड़ा.
पढाई-लिखाई में कोई कमी नहीं होने दिया. आशिष ने बताया कि मां-बाप मेरे सपनों को अपना सपना मान लिए थे. आशिष ने बताया कि मां-पिता जब दुकान लगाने के लिए सुबह 3 बजे उठ जाते थे. इस दौरान वह पढ़ाई शुरू करते थे.
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