Ranchi News: भाकपा माले ने SIR रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गुजरात में झारखंड के प्रवासी मजदूरों के कथित शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की है. पार्टी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को सीमित करने के लिए पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर की बाध्यता पर भी सवाल उठाए. वहीं, JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में झारखंड सरकार से अभ्यर्थियों के पक्ष को मजबूती से न्यायालय में रखने की मांग की गई.
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सोमवार को रांची स्थित महेंद्र सिंह भवन, भाकपा माले राज्य कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य सहित अन्य नेताओं ने देश में चल रहे GEN-Z आंदोलन, वोट चोरी के आरोपों, चुनाव प्रक्रिया, लोकतांत्रिक अधिकारों और रोजगार से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी.
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि SIR को रद्द करने की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है. चुनाव आयोग के भीतर से ही वोट चोरी से जुड़ी घटनाओं के खुलासे सामने आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी तेज हुई है. उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बीच जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.
उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर भी चिंता जताई. उनका आरोप था कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए जटिल शर्तें लागू कर प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है. इस संदर्भ में उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की केंद्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा द्वारा पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने का उल्लेख करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बताया.
भाकपा माले के बगोदर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कॉमरेड विनोद सिंह ने गुजरात में झारखंड के प्रवासी मजदूरों के शोषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि झारखंड के विभिन्न इलाकों, खासकर गिरिडीह जिले से गुजरात गए मजदूरों से आठ घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है. इसके साथ ही उनकी साप्ताहिक छुट्टी भी समाप्त किए जाने की शिकायतें हैं. कपड़ा मिलों सहित विभिन्न कारखानों में रविवार को भी छुट्टी नहीं मिलने की बात सामने आ रही है.
विनोद सिंह ने कहा कि मजदूरों के सम्मानजनक रोजगार और अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का प्रभावी संरक्षण मिलना चाहिए. मजदूरों को निर्धारित कार्य अवधि, साप्ताहिक अवकाश और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना जरूरी है.
निरसा के विधायक अरूप चटर्जी ने झारखंड में शिक्षा और रोजगार से जुड़े आंदोलनों में आइसा की भूमिका का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से संबंधित हालिया आंदोलनों में आइसा ने प्रमुखता से आवाज उठाई है. अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह न्यायालय में अभ्यर्थियों के पक्ष को मजबूती से रखे और सही तथ्यों एवं ठोस तर्कों के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत करे, ताकि छात्रों के हितों की रक्षा हो सके.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपांकर भट्टाचार्य ने आगामी सांगठनिक कार्यक्रमों की जानकारी भी दी. उन्होंने बताया कि 21 और 22 नवंबर 2026 को गिरिडीह जिले के सरिया में अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा. वहीं, 28 से 30 नवंबर 2026 तक महाराष्ट्र के नागपुर में आइसा का 11वां राष्ट्रीय सम्मेलन होगा. इसके अलावा इंकलाबी नौजवान सभा के सम्मेलन और भाकपा माले के राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियां भी चल रही हैं.
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