Ranchi : विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस हर साल 19 जून को मनाया जाता है. इस दिवस का उद्देश्य सिकल सेल रोग के प्रति लोगों को जागरूक करना और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयासों को मजबूत करना है.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2008 में इस दिवस की शुरुआत की थी. भारत में यह बीमारी विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है.सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है, जिसमें लाल रक्त कणिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय दरांती जैसी हो जाती हैं. इससे शरीर में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और मरीज को तेज दर्द, कमजोरी, पीलिया, सांस लेने में परेशानी तथा बार-बार संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 20 लाख से अधिक लोग सिकल सेल रोग से प्रभावित हैं. झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार के कई आदिवासी जिलों में यह बीमारी अधिक पाई जाती है. कई क्षेत्रों में 10 से 40 प्रतिशत आबादी सिकल सेल ट्रेट की वाहक है.
विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लिए सरकार राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन चला रही है. वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश को सिकल सेल मुक्त बनाना है. इसके तहत बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग, जेनेटिक काउंसलिंग और मुफ्त दवा उपलब्ध कराई जा रही है.
विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में जांच शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों के युवा विवाह से पहले सिकल सेल जांच अवश्य कराएं.
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार से इस बीमारी की रोकथाम संभव है. सिकल सेल मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में समाज की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है.
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