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रांची : 28 अप्रैल को कैबिनेट के बीच विरोध, सचिवालय सेवा संघ बनाएगा मानव श्रृंखला

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और कार्मिक विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए. संघ ने घोषणा की कि अपनी मांगों के समर्थन में 28 अप्रैल 2026 को प्रोजेक्ट भवन परिसर में एक विशाल मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज किया जाएगा.
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Ranchi : झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और कार्मिक विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए. संघ ने घोषणा की कि अपनी मांगों के समर्थन में 28 अप्रैल 2026 को प्रोजेक्ट भवन परिसर में एक विशाल मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज किया जाएगा.

 

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सचिवालय सेवा में उप सचिव के 41 और संयुक्त सचिव के 24 अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव पिछले 8 वर्षों से लंबित है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बावजूद कार्मिक विभाग ने इस प्रस्ताव को पिछले 3 वर्षों से रोक कर रखा है.

 

आरोप लगाया गया कि विभाग ने नियमों का उल्लंघन करते हुए इस प्रस्ताव को पदवर्ग समिति के पास भेज दिया, जबकि इस पर निर्णय विभागीय मंत्री स्तर से होना चाहिए था.

 

प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि सचिवालय सेवा के महत्वपूर्ण पदों पर भारी संख्या में रिक्तियां हैं, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है. अवर सचिव के 348 स्वीकृत पदों में से 221 पद यानी 63.5 प्रतिशत खाली हैं. उप सचिव के 57 पदों में से 19 पद यानी 33.33 प्रतिशत रिक्त हैं. वहीं, संयुक्त सचिव के 23 पदों में से 5 पद यानी 21.7 प्रतिशत पद खाली हैं.

 

संघ ने केंद्र के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य गठन के समय यह तय हुआ था कि सचिवालय सेवा की शर्तें केंद्र के अनुरूप होंगी. उन्होंने कहा कि केंद्र में तीसरी संवर्ग समीक्षा समिति के आधार पर सुधार लागू किए गए, लेकिन झारखंड में 16 वर्षों बाद भी कोई समीक्षा नहीं हुई और न ही केंद्र के समान लाभ दिए गए. वर्तमान में राजस्व पार्षद की अध्यक्षता में गठित नई समिति को संघ ने पक्षपातपूर्ण और अनावश्यक बताते हुए इसे भंग करने की मांग की.

 

संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार सिंह ने कार्मिक विभाग पर भेदभावपूर्ण व्यवहार और अनुचित नीतियां बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों के एपीएआर और एसीआर नियमों में भी नियमों के विरुद्ध बदलाव किए जा रहे हैं. संघ ने मांग की कि केंद्र की तर्ज पर चतुर्थ संवर्ग पुनर्गठन समिति की रिपोर्ट के आधार पर पद संरचना लागू की जाए.

 

संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. 28 अप्रैल को प्रस्तावित मानव श्रृंखला इसी दिशा में पहला कदम बताया गया है. खास बात यह है कि इसी दिन 28 अप्रैल को ही राज्य कैबिनेट की बैठक भी प्रस्तावित है, जिससे इस विरोध प्रदर्शन को और अधिक महत्व मिल रहा है.

 


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