Ranchi : बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के मात्रात्मक अर्थशास्त्र एवं डेटा विज्ञान विभाग (QEDS) द्वारा आयोजित एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम “हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI-HYDA 2026)” का सफल समापन हुआ.
कार्यक्रम का आयोजन ई एंड आईसीटी अकादमी, एनआईटी पटना के सहयोग से और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के तत्वावधान में किया गया.
कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न संस्थानों से 90 से अधिक संकाय सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं शोधार्थियों ने भाग लिया. इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग, जियोएआई, दूरसंवेदी तकनीक और भू-स्थानिक विश्लेषण के नवीनतम आयामों से अवगत कराना था.
सप्ताहभर चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डेटा पूर्व-प्रसंस्करण, इमेज वर्गीकरण, मशीन लर्निंग, फीचर इंजीनियरिंग, डीप लर्निंग, विजन ट्रांसफॉर्मर्स, ट्रांसफर लर्निंग, एक्सप्लेनेबल एआई और एआई आधारित भू-स्थानिक समाधान जैसे विषयों पर व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए.
कार्यक्रम में बीएचयू, एनआईटी पटना, आईआईटी पटना, आईसीएआर, आईएआरआई, इन्फोसिस फिनैकल, NESAC सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की. प्रतिभागियों को पायथन आधारित हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग मॉडल कार्यान्वयन, स्पेक्ट्रोस्कोपी और एआई-सक्षम भू-स्थानिक विश्लेषण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया.
समापन समारोह में आईएआरआई, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर. एन. साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित करते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान, कृषि नवाचार और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया.
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनीष कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया. आयोजकों के अनुसार, AI-HYDA 2026 ने ज्ञान-विनिमय, क्षमता निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ डेटा विज्ञान एवं पर्यावरणीय अनुसंधान के क्षेत्र में नए सहयोग की संभावनाओं को मजबूत किया.
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