Ranchi: स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए. विश्वविद्यालय परिसर पूरे दिन उत्साह, ऊर्जा और राष्ट्रभाव से सराबोर रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और अधिकारियों ने भाग लेकर स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात किया.

कार्यक्रम की शुरुआत स्वदेशी संकल्प दौड़ से हुई, जिसमें सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की. वहीं, विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर में स्थित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर कुलपति प्रो. के.बी दास, ‘क्षमता विकास आयोग’ के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) के कुलपति प्रो. अशोक आर. पाटिल सहित कर्मचारियों एवं छात्रों ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
व्याख्यान कार्यक्रम में वक्ता बोले
जयंती के अवसर पर सभागार में व्याख्यान कार्यक्रम आयोजन किया गया. वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के बहुआयामी व्यक्तित्व, राष्ट्रवादी चिंतन तथा युवाओं में उनके अटूट विश्वास पर विस्तार से प्रकाश डाला. मुख्य अतिथि डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और दर्शन आज के युवाओं के लिए पथप्रदर्शक है. उन्होंने कहा, “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको—यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है. सेवा-भाव की कमी समाज को भटका देती है, इसलिए अहंकार त्यागकर मानवता की गहराई को समझना आवश्यक है.”
प्रो. अशोक आर. पाटिल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति माना. उन्होंने चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास और सेवा-भाव को सशक्त राष्ट्र की नींव बताया. कुलपति प्रो. के.बी दास ने कहा कि विकसित भारत का सपना सबसे पहले स्वामी विवेकानंद ने देखा था. उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास के साथ ईमानदारी एवं सेवा-भाव से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया.
कार्यक्रम के दौरान आर्ट एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार मयन्ना गोवड़ा ने अपनी नई ऑडियो कृति का विमोचन किया, जिसमें हिंदुस्तानी शास्त्रीय रागों का सुंदर समावेश है. इस रचनात्मक प्रयास की कुलपति सहित सभी अतिथियों ने सराहना की. कार्यक्रम के समापन पर कुलसचिव के.के. राव ने कुलपति, मुख्य अतिथियों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया. साथ ही एनएसएस समन्वयक डॉ. ऋषिकेश महतो और उनकी टीम के योगदान की विशेष प्रशंसा की, जिनके प्रयासों से कार्यक्रम संपन्न हुआ.
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