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रांची: सिकल सेल पीड़ितों को राहत की उम्मीद, सिविल सर्जन ने कार्रवाई का दिया भरोसा

Ranchi : थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और दिव्यांगजनों से जुड़ी समस्याओं को लेकर शनिवार को रांची सदर अस्पताल के ऑडिटोरियम हॉल में एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया. 

 

यह कार्यक्रम लहू बोलेगा रक्तदान संगठन और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन के संयुक्त प्रयास से सदर अस्पताल के सहयोग से संपन्न हुआ. परिचर्चा में बड़ी संख्या में पीड़ित, उनके परिजन और रक्तवीर शामिल हुए, जिन्होंने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं.

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रांची के सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार रहे, जबकि उद्घाटन रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश सिंह ने किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता लहू बोलेगा और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन के संस्थापक नदीम खान ने की. संचालन थैलेसीमिया पीड़ित की परिजन सुजाता कुमारी और दिव्यांगजनों के विशेष शिक्षक रक्तवीर पॉवेल कुमार ने किया.

 

इस परिचर्चा में रांची शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के अलावा खूंटी, लोहरदगा, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग और सरायकेला-खरसावां से आए पीड़ित और परिजन भी शामिल हुए.

 

सभी ने एक स्वर में कहा कि रांची सदर अस्पताल की डे केयर यूनिट से पिछले कुछ महीनों में सहयोग बेहतर हुआ है, लेकिन अभी भी कई व्यावहारिक समस्याएं बनी हुई हैं जिनका समाधान जरूरी है.

 

पीड़ितों और उनके परिजनों ने मांग रखी कि सदर अस्पताल से निश्चित समय सीमा के भीतर बिना पैरवी और बिना डोनर के रक्त उपलब्ध कराया जाए.

 

साथ ही निजी ब्लड बैंकों से भी थैलेसीमिया और सिकल सेल पीड़ितों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं. सदर अस्पताल ब्लड बैंक में इन मरीजों के लिए अलग ब्लड काउंटर की स्थापना, बैठने की बेहतर व्यवस्था और मानवीय सुविधाओं को दुरुस्त करने की आवश्यकता भी सामने रखी गई.

 

गर्मी के मौसम में रक्त की कमी को लेकर भी चिंता जताई गई. पीड़ितों ने कहा कि इस दौरान रक्तदान शिविरों की संख्या कम हो जाती है, जिससे समय पर रक्त मिलना मुश्किल हो जाता है. इस समस्या से निपटने के लिए रक्तदान महादान अभियान को तेज करने और व्यापक जनजागरूकता चलाने की मांग की गई.

 

परिचर्चा में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बहुत कम है. वर्तमान में पूरे झारखंड में गिने-चुने डॉक्टर उपलब्ध हैं और वे भी सीमित समय के लिए.

 

इसे अव्यावहारिक बताते हुए 24 घंटे विशेषज्ञ सेवा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई. डे केयर यूनिट में प्रशिक्षित और अनुभवी स्टाफ की तैनाती, नौसिखिए कर्मियों को वहां से हटाने, मरीजों की छुट्टी न्यूनतम 10 हीमोग्लोबिन स्तर पर ही देने और प्रतिदिन देखे जाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ाने जैसे सुझाव भी दिए गए.

 

पीड़ितों ने ब्लड पाउच की मात्रा कम से कम 200 एमएल से अधिक रखने, डिजिटल ब्लड उपकरणों का उपयोग बढ़ाने, एचपीएलसी जांच रिपोर्ट को लेकर आ रही विसंगतियों को दूर करने और सभी आवश्यक दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की. इसके साथ ही मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल परिसर में निःशुल्क पार्किंग की सुविधा देने का भी आग्रह किया गया.

 

सभी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग भी प्रमुख रही. इसके तहत रक्त उपलब्धता, थैलेसीमिया और सिकल सेल कार्ड, दिव्यांग प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, राशन कार्ड, अबुआ स्वास्थ्य योजना, दिव्यांग पेंशन, भारत सरकार की एनएसपी छात्रवृत्ति योजना और सभी प्रकार की जांच निःशुल्क कराने की व्यवस्था एक ही स्थान से करने का सुझाव दिया गया.

 

सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार और उपाधीक्षक डॉ बिमलेश सिंह ने सभी पीड़ितों और परिजनों की बात गंभीरता से सुनी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन मामलों का त्वरित समाधान संभव है, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी, जबकि अन्य विषयों पर चर्चा कर चरणबद्ध निर्णय लिए जाएंगे. उन्होंने सभी मांगों को लिखित रूप में देने को कहा ताकि उन्हें सूचीबद्ध कर तय समय सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

 

कार्यक्रम के अंत में मरीजों और संगठनों की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह, झारखंडी अंगवस्त्र और बुके भेंट कर सम्मानित किया गया. बड़ी संख्या में परिजन और रक्तवीर इस परिचर्चा में मौजूद रहे. आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस संवाद से थैलेसीमिया, सिकल सेल और दिव्यांगजनों के जीवन में ठोस और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा.

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