Ranchi: राजधानी रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने जिले में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान के शुभारंभ की घोषणा की है. यह अभियान 30 जनवरी से 14 फरवरी तक संचालित किया जाएगा. अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में अब तक चिन्हित नहीं हो पाए कुष्ठ रोग के मामलों की पहचान करना और इस बीमारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों व भेदभाव को समाप्त करना है.
डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि कुष्ठ रोग एक जीवाणु जनित बीमारी है. जो पूरी तरह से इलाज योग्य है. इसके बावजूद जानकारी के अभाव और गलत धारणाओं के कारण मरीजों को सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्ति भी समाज के सम्मानित सदस्य हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव अस्वीकार्य है.
सिविल सर्जन ने कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि शरीर पर तांबे के रंग के ऐसे धब्बे, जिनमें छूने पर संवेदना नहीं होती, इस बीमारी का संकेत हो सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है, क्योंकि कई अन्य त्वचा रोगों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
डॉ. कुमार ने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी में ऐसे लक्षण नजर आएं तो बिना किसी संकोच के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर चिकित्सकीय जांच कराएं. समय पर पहचान और समुचित उपचार से कुष्ठ रोग को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और इसके प्रसार को भी प्रभावी रूप से रोका जा सकता है.
उन्होंने कहा कि स्पर्श अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य समाज में जागरूकता बढ़ाना और कुष्ठ रोग के प्रति सकारात्मक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करना है.
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