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Ranchi : छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर कल्याण विभाग के बाहर छात्रों का प्रदर्शन, मंत्री चमरा लिंडा से मांगा इस्तीफा

Ranchi News : छात्रों ने आरोप लगाया कि फीस जमा नहीं करने पर कॉलेजों की ओर से जुर्माना लगाया जा रहा है. कई विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठने और परीक्षा में शामिल होने से भी रोका जा रहा है. इससे छात्रों पर आर्थिक दबाव के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है.
 
एआईएसएफ का प्रदर्शन

Ranchi News : पिछले दो-तीन वर्षों से छात्रवृत्ति नहीं मिलने से नाराज छात्रों ने गुरुवार को एआईएसएफ (AISF) के नेतृत्व में कल्याण विभाग के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और गरीब परिवारों के छात्र शामिल हुए. छात्रों ने कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कल्याण मंत्री चमरा लिंडा के इस्तीफे की मांग की.

 

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प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति अब तक नहीं मिली है. कई छात्रों के आवेदन पिछले डेढ़ साल से डीएनओ (DNO) और डीएलसी (DLC) स्तर पर लंबित हैं. छात्रों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है.

 

प्रदर्शन में रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची, आइडियल एकेडमी ऑफ नर्सिंग एजुकेशन सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थी शामिल हुए. छात्रों ने बताया कि छात्रवृत्ति नहीं मिलने के कारण कई विद्यार्थियों को कॉलेज फीस और दूसरे खर्चों के लिए परेशान होना पड़ रहा है. कुछ छात्र पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए रात में स्विगी और जोमैटो में डिलीवरी का काम कर रहे हैं. वहीं, कई विद्यार्थियों ने ब्याज पर कर्ज लेकर अपनी पढ़ाई जारी रखी है.

 

छात्रों ने आरोप लगाया कि फीस जमा नहीं करने पर कॉलेजों की ओर से जुर्माना लगाया जा रहा है. कई विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठने और परीक्षा में शामिल होने से भी रोका जा रहा है. इससे छात्रों पर आर्थिक दबाव के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है.

 

प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े सरकारी आंकड़ों पर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि सरकार की ओर से 30 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ देने की बात कही जाती है, जबकि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का लाभ वास्तविक रूप से करीब 1.5 लाख विद्यार्थियों को ही मिला है. उन्होंने प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत 29 लाख विद्यार्थियों के खाते में औसतन 210 रुपये भुगतान दर्ज होने के आंकड़े पर भी सवाल उठाए. जनजातीय विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में दी जा रही राशि को भी अपर्याप्त बताया.

 

छात्र नेताओं ने छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता की मांग की. उन्होंने विभाग से लंबित आवेदनों का तत्काल निपटारा करने और सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की मांग की.

 

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने 15 सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में मांगें पूरी नहीं होने पर कल्याण विभाग के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा.

 

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