Ranchi News : सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बेहतर करने के लिए रांची जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) कार्यालय की ओर से जिला शिक्षा सुधार परियोजना संचालित की जा रही है. इसके तहत जिले के सरकारी प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के साथ मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में पढ़ाई की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है.
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परियोजना का लक्ष्य कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षा में राज्य में पहले स्थान को बरकरार रखना है. वहीं, कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत रिजल्ट हासिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. DSE बादल राज के नेतृत्व में इस परियोजना को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
परियोजना के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के सभी सरकारी स्कूलों और कक्षा नौवीं से 12वीं तक के मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों को शामिल किया गया है. इसके प्रभावी संचालन के लिए DSE कार्यालय स्तर पर T.E.A.M. का गठन किया गया है. इसका पूरा नाम Testing, Evaluation, Assessment and Mentoring है. इसके अलावा विभिन्न विषयों के करीब 100 विशेषज्ञों की केंद्रीय टीम बनाई गई है. यह टीम प्रश्नपत्र तैयार करने और मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी करती है.
मासिक परीक्षा से हो रही विद्यार्थियों की तैयारी
निर्धारित समय-सारणी के अनुसार स्कूलों में पाठ्यक्रम पूरा कराया जाता है. इसके बाद उसी पाठ्यक्रम के आधार पर प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं. हर महीने के अंतिम सप्ताह में मासिक परीक्षा आयोजित होती है. अगले महीने के पहले सप्ताह में कॉपियों का मूल्यांकन पूरा कर लिया जाता है. इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रदर्शन का नियमित आकलन हो रहा है.
कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए मासिक परीक्षा के अलावा प्री-बोर्ड, प्री-एस्से-1 और प्री-एस्से-2 परीक्षाएं भी आयोजित की जा रही हैं. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के पैटर्न से परिचित कराना और परीक्षा से पहले उनकी तैयारी मजबूत करना है.
कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर हो रही काउंसलिंग
परियोजना के तहत प्रत्येक विद्यार्थी का अलग-अलग डिजिटल रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है. इसके माध्यम से हर महीने उसके प्रदर्शन की समीक्षा की जाती है. जिन विद्यार्थियों के अंक कम आते हैं, उनकी पहचान कर विशेष काउंसलिंग की जाती है.
विषय शिक्षक और क्लास टीचर ऐसे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी संचालित करते हैं. उनकी कमजोरियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि अगले महीने की परीक्षा में उनके प्रदर्शन में सुधार हो सके.
क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की परीक्षा में भी पहल
रांची जिला क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की परीक्षा को लेकर भी विशेष पहल कर रहा है. DSE बादल राज ने बताया कि राज्य में रांची एकमात्र ऐसा जिला है, जहां JAC की बोर्ड परीक्षा से पहले ही सभी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की परीक्षाएं जिला स्तर पर आयोजित की जाती हैं. इससे इन भाषाओं के विद्यार्थियों को अपनी तैयारी परखने और कमियों को दूर करने का अवसर मिलता है.
जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों पर विशेष फोकस
जिले के पांच मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षा में पिछले सत्र में हासिल राज्य की नंबर-1 रैंकिंग को बरकरार रखने के लिए भी विशेष रणनीति बनाई गई है. DSE बादल राज के नेतृत्व में इन विद्यालयों के परीक्षा परिणामों की नियमित समीक्षा और सुधारात्मक कदमों पर जोर दिया जा रहा है.
CRC के माध्यम से स्कूलों की निगरानी
स्कूलों में पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संकुल संसाधन केंद्रों (CRC) के माध्यम से भी नियमित निगरानी की जा रही है. प्रत्येक CRC के अंतर्गत आठ से 23 विद्यालय जुड़े हुए हैं. इनके जरिए स्कूलों की दैनिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा आयोजन और रिपोर्टिंग पर नजर रखी जाती है.
बच्चों की रोजाना उपस्थिति की भी मॉनिटरिंग की जाती है, ताकि स्कूलों में उनकी नियमित भागीदारी सुनिश्चित हो सके. यदि किसी विद्यार्थी की उपस्थिति में अनियमितता मिलती है, तो उस पर भी ध्यान दिया जाता है. इससे जिला स्तर पर स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति और विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित जानकारी मिल रही है.
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