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रांची: पशु चिकित्सकों का पेशा मानव डॉक्टरों से अधिक पवित्र- डॉ. एस.सी. दुबे

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के पशु चिकित्सा कॉलेज में शनिवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस मनाया गया. समारोह की अध्यक्षता कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने की. समारोह के दौरान आयोजित क्विज, पोस्टर मेकिंग, डिबेट और रंगोली प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया.
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Ranchi: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के पशु चिकित्सा कॉलेज में शनिवार को विश्व पशु चिकित्सा दिवस मनाया गया. समारोह की अध्यक्षता कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने की. समारोह के दौरान आयोजित क्विज, पोस्टर मेकिंग, डिबेट और रंगोली प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया. साथ ही बकरियों व अन्य पशुओं के लिए स्वास्थ्य शिविर और नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया.

 

इस मौके पर कुलपति ने कहा कि पशु चिकित्सकों का पेशा मानव डॉक्टरों से अधिक पवित्र है, क्योंकि वे मूक पशु-पक्षियों की सेवा करते हैं जो अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते. पशु स्वास्थ्य सीधे मानव और पर्यावरण से जुड़ा है, इसलिए इस क्षेत्र की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.

 

डॉ. दुबे ने कहा कि पशु स्वास्थ्य के संरक्षक के रूप में पशु चिकित्सकों का जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. उन्होंने पशु उत्पादों में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से जूझ रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों के हितों से समझौता किए बिना किए जाने चाहिए.

 

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं पशु चिकित्सा संकाय के पूर्व डीन तथा आरकेडीएफ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. ए.के. श्रीवास्तव ने कहा कि पशु चिकित्सा पेशा विश्व स्तर पर बेहतरीन करियर विकल्पों में से एक है, जहां बेरोजगारी की समस्या नगण्य है. उन्होंने छात्रों को विनम्र, अनुशासित, मेहनती और लचीला बनने की सलाह दी.

 

पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन संकाय के डीन डॉ. एम.के. गुप्ता ने कहा कि पशु चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में पशुधन, वन्य एवं बंदी पशुओं की सेवा करते हैं. उन्होंने इस क्षेत्र में बेहतर बुनियादी ढांचा, सुरक्षा उपाय और मानक संचालन प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर बल दिया.

 

उन्होंने बताया कि देश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध, मांस और अंडों की उपलब्धता क्रमशः लगभग 480 मिलीलीटर, 15–20 ग्राम और 100–110 ग्राम के आसपास है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है. कार्यक्रम में डॉ. ए.के. शर्मा, डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव, डॉ. डी.के. सिंह ‘ड्रोन’ और छात्र राहुल प्रसाद ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रज्ञा प्रिया लकड़ा और डॉ. विशाखा सिंह ने किया. 

 

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