Ranchi : आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव के नेतृत्व में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकभवन, रांची में राज्यपाल से मुलाकात कर महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं राजनीतिक मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित परिसीमन, अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के संरक्षण और आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड लागू करने की मांग उठाई.
ज्ञापन में कहा गया कि परिसीमन प्रक्रिया के दौरान झारखंड के आदिवासी समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए और 1971 की जनगणना के आधार पर अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों की वर्तमान व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए.
प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जताई कि यदि वर्ष 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया तो झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करीब 6 विधानसभा सीटें और 1 लोकसभा सीट प्रभावित हो सकती है, जिससे आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ सकता है.
आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण आदिवासी समाज के लंबे संघर्ष, बलिदान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा की भावना के साथ हुआ है. ऐसे में केवल जनसंख्या में बदलाव को आधार बनाकर आदिवासी प्रतिनिधित्व में कमी स्वीकार नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत झारखंड के आदिवासियों को जो राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त है, उसे अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए. साथ ही विकास परियोजनाओं, खनन, औद्योगिकीकरण और विस्थापन से उत्पन्न जनसांख्यिकीय बदलाव का असर राजनीतिक अधिकारों पर नहीं पड़ना चाहिए.
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि आदिवासी भूमि, मूलवासी क्षेत्रों और सरकारी गैर-मजरूआ जमीन पर अनधिकृत कब्जे, बाहरी व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विस्तार से हुए जनसंख्या बदलाव को परिसीमन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए.
वहीं, आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय कोषाध्यक्ष सह संयोजक डॉ. जलेश्वर भगत ने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग कई दशकों से उठाई जा रही है और वर्ष 2027 की जनगणना से पहले इसे लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में भी संगठन और अन्य समूहों ने नई दिल्ली स्थित रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) से मिलकर जनगणना प्रपत्र में पृथक सरना धर्म कॉलम की मांग की थी.
उन्होंने कहा कि संगठन झारखंड के साथ-साथ ओड़िशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में जन-जागरूकता अभियान चलाएगा ताकि आदिवासी समाज अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जनगणना में दर्ज करा सके.
प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव, केंद्रीय कोषाध्यक्ष सह संयोजक डॉ. जलेश्वर भगत, रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष मनोज उरांव, विद्यासागर, संजय एवं रवि शामिल थे.
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