Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बुधवार को मामले की पहली सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में हुई. मालूम हो कि बीते कई महीनों से छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ लगातार आंदोलन और विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
डिपार्टमेंट है तो इंस्टीट्यूट क्यों?
छात्रों का आरोप है कि उन्हें दी जा रही डिग्रियां गलत नाम से जारी की जा रही हैं. विश्वविद्यालय विभाग (University Department) के बजाय डिग्रियों पर इंस्टीट्यूट के नाम का उल्लेख किया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं विश्वविद्यालय पदाधिकारियों का कहना है कि यह एक डिपार्टमेंट है, जिसे केवल इंस्टीट्यूट के नाम से संचालित किया जा रहा है. इसी को लेकर छात्रों ने सवाल उठाया है कि यदि यह डिपार्टमेंट है तो फिर इसे इंस्टीट्यूट के नाम से चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी.
मूट कोर्ट स्थापना की मांग
छात्रों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कई बार विश्वविद्यालय के अलग-अलग पदाधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन किसी ने भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना. छात्रों की प्रमुख मांगों में मूट कोर्ट की स्थापना, फैकल्टी की संख्या बढ़ाना (जहां वर्तमान में केवल 6 फैकल्टी हैं, जबकि नियमानुसार 10 होनी चाहिए), तथा स्थायी निदेशक (परमानेंट डायरेक्टर) की नियुक्ति शामिल है.
HOD और डायरेक्टर को लेकर गड़बड़-झाला
छात्रों का यह भी कहना है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय विभाग में केवल HOD का प्रावधान होता है, जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में डायरेक्टर का पद दर्शाया जा रहा है. इस प्रकार ILS किसी भी दृष्टि से BCI के मानकों को पूरा नहीं कर रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है.
4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करे
इन सभी मुद्दों को लेकर छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. आज हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति राजेश कुमार ने कहा कि छात्रों के हित में उचित कार्रवाई अवश्य की जाएगी. कोर्ट ने मामले में डीन, CVS, डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर, रजिस्ट्रार, रांची विश्वविद्यालय सहित अन्य पदाधिकारी को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह बताया जाए कि गलती किस स्तर पर हुई है और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के लिए कौन जिम्मेदार है.
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
मामले के मुख्य याचिकाकर्ता अंबेश चौबे, आर्यन देव, तुषार दुबे और देवेश नंद तिवारी हैं, साथ ही ILS के सभी अन्य छात्र भी इस मामले में शामिल हैं. अब सभी की निगाहें चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जिससे छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है.
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