Ranchi : संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच, झारखंड के आह्वान पर गुरुवार को राजधानी रांची में मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ काला दिवस कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया. इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा का भी समर्थन मिला.
शाम को अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में मजदूरों, कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने एकत्र होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने काले बैज और काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और नारेबाजी के माध्यम से चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की.
सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकारों को कमजोर करती हैं. उनका आरोप था कि इन कानूनों के जरिए कार्य समय बढ़ाने, यूनियन बनाने के अधिकार को सीमित करने, हड़ताल के अधिकार को कमजोर करने और स्थायी काम में ठेका प्रथा को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. साथ ही वेतन और सामाजिक सुरक्षा पर भी असर पड़ने की बात कही गई.
वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन संहिताओं को लागू करने में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और श्रमिक संगठनों से संवाद की अनदेखी की गई है. उन्होंने मांग की कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए.
कार्यक्रम में किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए. वक्ताओं ने बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि ये कानून किसानों को कॉरपोरेट पर निर्भर बना सकते हैं. साथ ही मनरेगा में काम की गारंटी कमजोर होने और ग्रामीण रोजगार के अवसरों में कटौती पर भी चिंता जताई गई.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉमरेड शुभेंदु सेन ने की. सभा को एटक के पंकज कुमार और सरिता देवी, एआईसीसीटीयू के भीम साहू, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के गोपाल शरण सिंह, आईसा के त्रिलोकी नाथ, बेफ के एम.एल. सिंह, किसान सभा के मदुआ कच्छप, खेत मजदूर यूनियन के बीरेंद्र कुमार तथा सीटू के प्रतीक मिश्रा, हरेंद्र यादव और भवन सिंह ने संबोधित किया.
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