- - हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल के साथ खड़ा होकर दे रहा था आंदोलन की चेतावनी
Ranchi : हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में झारखंड की बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. झारखंड में अपराधियों को हौसले बुलंद हैं. वे बेखौफ होकर घूम रहे हैं, इस घटना के जिसने भी अंजाम दिया है, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए. इस घटना में शामिल अपराधियों को एक-एक पीस काटा भी जाए तब भी कम पड़ जाएगा. ये बातें कहने वाला कोई और नहीं बल्कि विष्णुगढ़ के कुसुंबा में नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या करने का मुख्य आरोपी भाजपा नेता भीम राम है.

विष्णुगढ़ के कुसुंबा में सांसद नवीन जायसवाल के साथ खड़ा नाबालिग की हत्या का आरोपी भाजपा नेता भीम राम
हत्या के बाद भीम राम ने पुलिस और सरकार पर ही निशाना साधना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, उनके समर्थन में भाजपा के कई सभी नेता और कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी सामने आए. ये सभी लोग एक साथ बैठकर सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाने लगे कि झारखंड में अपराध बढ़ रहे हैं और बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. आंदोलन की चेतावनी दे रहे थे. अब सभी चुप हैं.
इसी मुद्दे को लेकर हजारीबाग बंद भी कराया गया और तीन अप्रैल को झारखंड बंद का ऐलान तक कर दिया गया था. लेकिन एक अप्रैल की रात हजारीबाग एसपी ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया. पुलिस जांच में सामने आया कि अंधविश्वास के कारण इस नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या की गई थी. पुलिस ने इस मामले में मृतक की मां, एक अन्य महिला और भाजपा नेता भीम राम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
नाबालिग की हत्या का आरोपी भाजपा नेता भीम राम भाजपा के नेताओं के साथ हरे घेरे में
तस्वीरों में भी देखा जा सकता है कि आरोपी के साथ कई नेता बैठे हुए हैं और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब खुद अपराध में शामिल लोग ही राजनीति का सहारा लेकर माहौल बनाने की कोशिश करें, तो इसे क्या कहा जाए?

कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कानून व्यवस्था पर उठाया था सवाल
कौन लेगा दुष्कर्म का अफवाह उड़ाने की जिम्मेदारी!
हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 साल की बच्ची की बलि देने की घटना के बाद भाजपा हजारीबाग पुलिस पर हमलावर रही. इस पार्टी ने अपने बयानों में बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की बात को खूब उछाला. विरोध में हजारीबाग बंद किया. पुलिस-प्रशासन को एक दिन का भी वक्त नहीं दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक का इंतजार नहीं किया. और अब उसी की पार्टी का नेता इस घटना में गिरफ्तार हुआ है. तब पार्टी नेताओं ने चुप्पी साध ली है.
इन घटनाक्रमों के बीच असल सवाल यह उठता है कि आखिर एक बच्ची, जिसकी हत्या हो चुकी है, उसके नाम पर राजनीति करने, बिना इंतजार किये उसके साथ दुष्कर्म होने की बात फैलाने और मृत्यु के बाद उसके सम्मान की धज्जियां उड़ाने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
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