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हार से बौखलाई कांग्रेस दूसरों पर मढ़ रही ठीकरा: माले

  • माले पर लगाए गए आरोपों को किया खारिज, बोले- कांग्रेस अपने विधायकों को नहीं संभाल पाई, इसलिए हारी

Ranchi : झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद महागठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. कांग्रेस प्रभारी के. राजू द्वारा राजद और माले पर धोखा देने के लगाए गए आरोपों पर माले विधायक अरूप चटर्जी ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस दूसरे दलों पर दोष मढ़ने का प्रयास कर रही है.

 


अरूप चटर्जी ने कहा कि माले के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया है. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने गठबंधन धर्म का पूरी तरह पालन किया और अंत तक महागठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन किया. ऐसे में माले पर आरोप लगाना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है.


उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की पुरानी आदत रही है. जब भी चुनावी हार मिलती है तो वह आत्ममंथन करने के बजाय सहयोगी दलों को जिम्मेदार ठहराने लगती है. कांग्रेस नेताओं को पहले अपने घर के भीतर झांकना चाहिए. संभव है कि उनके ही कुछ विधायकों ने उम्मीदवार का साथ नहीं दिया हो.


माले विधायक ने कांग्रेस संगठन और नेतृत्व पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्हें होटल में रखकर निगरानी करनी पड़ी. इसके बावजूद यदि पार्टी उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला तो इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस नेतृत्व को लेनी चाहिए.


अरूप चटर्जी ने कहा कि माले हमेशा विचारधारा और सिद्धांतों की राजनीति करती रही है. उन्होंने कहा कि हमने सरकार को समर्थन दिया, लेकिन कभी मंत्री पद या सत्ता में हिस्सेदारी के लिए दबाव नहीं बनाया. सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए हमारी पार्टी लगातार संघर्ष और त्याग करती रही है.


उन्होंने आगे कहा कि राज्यसभा चुनाव का परिणाम कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व की विफलता का परिणाम है. संख्या बल होने के बावजूद यदि गठबंधन का उम्मीदवार जीत नहीं सका तो यह कांग्रेस प्रभारी, प्रदेश नेतृत्व और मंत्रियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है. चटर्जी ने कहा कि कांग्रेस को सहयोगी दलों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी राजनीतिक कमजोरियों और संगठनात्मक खामियों की समीक्षा करनी चाहिए.


राज्यसभा चुनाव के बाद महागठबंधन के भीतर शुरू हुई यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और राजनीतिक गर्मी बढ़ा सकती है. फिलहाल कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच चुनावी हार को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है.

 

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