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खून की कमी के खिलाफ संघर्ष की पहचान, रांची के नदीम खान पद्मश्री सम्मान के लिए नामित

Ranchi: अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जब परिजन खून की व्यवस्था के लिए भागते हैं और हर मिनट की कीमत किसी जिंदगी से जुड़ जाती है, तब यह एहसास होता है कि रक्तदान केवल सामाजिक कार्य नहीं बल्कि जीवनदान है. 

 

अफसोस यह है कि करोड़ों की आबादी वाले देश में आज भी बहुत कम लोग रक्तदान के लिए आगे आते हैं और बड़ी आबादी इन्हीं गिने-चुने दानवीरों पर निर्भर रहती है. ऐसे ही हालात में रांची के नदीम खान लगातार वर्षों से मानवता की इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाए हुए हैं.

 

नदीम खान आज झारखंड में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए भरोसे का नाम बन चुके हैं. वर्ष 2013 से वे बिना किसी स्वार्थ के रक्तदान को लेकर जनजागरुकता फैलाने और जरूरतमंदों तक रक्त पहुंचाने में जुटे हैं.

 

सामाजिक संगठनों, क्लबों, धार्मिक स्थलों और शहरी स्लम इलाकों में सर्वधर्म समन्वय के साथ रक्तदान शिविर आयोजित कराना उनकी पहचान बन गई है.

 

लहू बोलेगा रक्तदान संगठन रांची और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन के माध्यम से वे अपनी टीम और सहयोगियों के साथ नियमित रूप से रक्तदान शिविर लगाते हैं.

 

इन शिविरों में एकत्र किया गया रक्त सदर अस्पताल रांची और रिम्स जैसे सरकारी ब्लड बैंकों को सौंपा जाता है. अब तक हजारों मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर वे कई परिवारों के लिए उम्मीद की वजह बने हैं.

 

नदीम खान झारखंड के 24 जिलों में सक्रिय 150 से अधिक रक्तदान संगठनों और रक्तवीरों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं और जरूरतों को लेकर वे मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और अधिकारियों से लगातार संवाद करते रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यावहारिक समाधान निकल सकें.

 

उनकी सादगी और सहज व्यवहार उन्हें खास बनाता है. वे जहां भी जाते हैं, लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं और यह समझाते हैं कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह आत्मिक संतोष और मानवीय खुशी देता है.

 

नदीम खान स्वयं अब तक 37 बार रक्तदान कर चुके हैं. उनकी निरंतर सेवा और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें पद्मश्री सम्मान के लिए नामित किया गया है.

 

यदि एक जमीनी स्तर पर काम करने वाले ऐसे व्यक्ति को यह राष्ट्रीय सम्मान मिलता है, तो यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का क्षण होगा.

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