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झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार व सदस्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा

Ranchi :   झारखंड स्टेट ड्रग कंट्रोलर ने फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार और सदस्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की है. जांच समिति ने रजिस्ट्रार के शैक्षणिक डिग्रियों के फर्जी होने की आशंका जतायी है.

 

जांच में काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत कुमार पांडेय और सदस्य धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ लगे जालसाजी के आरोपों के सही पाये जाने के बाद यह अनुशंसा की गयी है.

 

धर्मेंद्र कुमार स्टेट फार्मेसी काउंसिल के इलेक्टेड सदस्य हैं. प्रशांत पांडेय को रजिस्ट्रार के पद पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने नियुक्त किया था. प्रशांत पांडेय से पहले बन्ना गुप्ता ने राहुल कुमार को स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया था.

 

गलत तरीके से राहुल कुमार की नियुक्ति मामले में भारी हंगाने के बाद मामले की जांच करायी गयी थी. जांच में राहुल पर लगे आरोपों के सही पाये जाने के बाद रजिस्ट्रार को पद से हटा दिया गया था.

 

इसके बाद प्रशांत कुमार पांडेय को स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया गया था. बन्ना गुप्ता द्वारा की गयी यह नियुक्ति भी विवादों में उलझी रही.

 

प्रशांत पांडेय पर लगे आरोपों की जांच दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के दो सहायक औषधि निरीक्षकों से करायी गयी. पहली बार जांच पूरी होने के बाद कुछ बिंदुओं पर दूसरी बार जांच का आदेश दिया गया. दोनों जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद प्रशांत पांडेय पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई.  

 

जांच में पाया गया कि प्रशांत पांडेय ने एक ही साथ तीन से अधिक फार्मेसी में काम की. यह फार्मेसी अधिनियम 1948 की धारा 42 का उल्लंघन भी है. नियमानुसार कोई फार्मेसिस्ट एक ही साथ कई फार्मेसियों में काम नहीं कर सकता है.

 

जांच में प्रशांत पांडेय द्वारा द्वारा फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर के इस्तेमाल करने का मामला भी पकड़ में आया. इन रजिस्ट्रेशन नंबरों को दस्तावेज में जालसाजी कर तैयार किया गया था.

 

साथ ही एक से अधिक जगह काम करने का सबूत मिटाने के लिए पोर्टल के डाटा में भी छेड़छाड़ किया था. जांच समिति ने प्रशांत पांडेय की डिग्रियों के फर्जी होने की आशंका जतायी है.

 

जांच के दौरान स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्य धर्मेंद्र सिंह पर लगे आरोप सही पाये गये हैं. धर्मेंद्र सिंह पर आरोप था कि उसने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया का एक्जिक्यूटिव मेंबर रहते हुए पदमा मेडिकल में काम किया.

 

नियमानुसार फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया का एक्जिक्यूटिन मेंबर रहते हुए वह दूसरी जगह काम नहीं कर सकता था. इस मुद्दे पर हंगामा और शिकायत होने के बाद उसने आठ मार्च 2025 को पदमा मेडिकल से त्याग पत्र दे दिया था.

 

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार और सदस्य के खिलाफ हुई जांच में मिली इन तथ्यों के मद्देनजर ड्रग कंट्रोलर ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सिचव से इन दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुशंसा की है.

 

साथ ही रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने, काउंसिल से ब्लैक लिस्ट करने और उसके पोर्टल को फ्रीज करने की अनुशंसा की गयी है.

 

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