- किसानों को सलाह, खेतों में पानी जमा न होने दें
- झारखंड में 5 नवंबर तक बारिश के आसार
Ranchi News: झारखंड में अगले पांच दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा. राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहेंगे. इसके साथ ही हल्की मध्यम बारिश होने की संभावना है. इस दौरान कुछ इलाकों में मेघ गर्जन और वज्रपात की भी आशंका जताई गई है. मौसम विभाग ने साहिबगंज, गोड्डा और पाकुड़ में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. वहीं किसानों को खेतों में जलजमाव रोकने और कटी हुई फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी है.
5 नवंबर तक ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, 2 और 3 नवंबर को आंशिक बादल छाए रहेंगे. कुछ स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ बारिश होने का अनुमान है. 4 नवंबर को उत्तर-पूर्वी, मध्य और दक्षिणी झारखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं 5 नवंबर को सुबह कुहासा रहने के बाद आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है. अगले तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है. अगले पांच दिनों तक न्यूनतम तापमान भी लगभग स्थिर रहने का अनुमान है.
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किसानों को सलाह, खेतों में पानी जमा न होने दें
बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. खेतों में पानी जमा होने से फसल गिरने, जड़ों के सड़ने और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने की सलाह दी है. कटाई के लिए तैयार फसलों की कटाई संभव हो तो बारिश रुकने तक टाल दें. पहले से काटी गई उपज को खुले में नहीं छोड़ें. उसे सुरक्षित स्थान पर रखकर प्लास्टिक या पॉलीथीन से ढक दें.
बारिश और तेज हवा के दौरान खाद डालने तथा कीटनाशकों का छिड़काव करने से बचने की सलाह दी गई है. सब्जियों की फसल को गिरने से बचाने के लिए पौधों को सहारा दें. नर्सरी में जलनिकासी की व्यवस्था रखें और रोगग्रस्त पौधों को हटा दें. पशुपालकों को भी पशुओं को खुले में नहीं रखने और उनके रहने की जगह सूखी रखने की सलाह दी गई है.
दाना भरने की अवस्था में धान, रोग का खतरा
खेती के मामले में कृषि विभाग ने बताया कि देर से बोई गई धान की फसल इस समय दाना भरने की अवस्था में है. यह फसल के लिए संवेदनशील समय है. इस दौरान खेत में अधिक पानी जमा होने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए जरूरत के अनुसार, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालते रहें. बादल और नमी के कारण धान में कंहुआ रोग का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में दवा का छिड़काव स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल के अनुसार ही करें.
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