Ranchi News: कोडरमा के मरकच्चो अंचल की जमीन पर जिला योजना से बन रहे PCC (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) सड़क के मामले में विस्थापित रैयतों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने दामोदर प्रसाद कुशवाहा एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई की.
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अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि मौजा मरकच्चो, थाना नं 141, खाता नं 1818, प्लॉट नं 620 की विषयगत 4.20 एकड़ रैयती जमीन पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाए और किसी भी प्रकार का पीसीसी निर्माण न किया जाए. अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद निर्धारित की गई है.
मामले में सरकार की ओर से उक्त जमीन को गैरमजरुआ बताया गया. साथ की इस निर्माण को सही ठहराया गया . कोर्ट ने सरकार के इस दलील को खारिज कर दिया.
कोर्ट ने स्पष्ट माना कि यह जमीन रैयती है, जिसका स्वामित्व सिविल कोर्ट से दशकों पहले ही तय हो चुका है. जमीन का हक सब-जज, हजारीबाग द्वारा टाइटल अपील नं 02/1981 में दिनांक 23.06.1984 को पारित फैसले से याचिकाकर्ताओं को मिला है, जिसे पटना हाईकोर्ट की रांची बेंच ने 27.07.1989 को कंफर्म किया था.
याचिकाकर्ता मरकच्चो, कोडरमा के निवासी हैं और पंचखेरो जलाशय के विस्थापित हैं. इनकी खाता नं 1818 की कुल 32.20 एकड़ में से 9.60 एकड़ जमीन पंजी-2 में स्व. नत्थू महतो व मसोमात रेबली देवी के नाम दर्ज है, जिसकी मालगुजारी आज भी दी जा रही है.
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उनकी 5.60 एकड़ जमीन पंचखेरो जलाशय में बिना मुआवजा भुगतान के ले ली गई, जबकि शेष 4.20 एकड़ पर वे लाहर की खेती कर जीवन-यापन कर रहे हैं. इसी बची हुई जमीन पर जिला योजना अनाबद्ध निधि से PCC सड़क बनाई जा रही थी, जबकि पर्यटन से जुड़े मछली शेड, छठ घाट, कृष्णा शेड आदि के सारे निर्माण PEHD ओवर ब्रिज के दाहिनी ओर हो रहे हैं. मुआवजा को लेकर मुख्य रिट 5299/2025 पहले से लंबित है, जिसमें 19.09.2025 को सरकार से जवाब तलब किया गया था.
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रवि कुमार एवं राजीव कुमार पांडेय ने बहस की. उनके ओर से कहा गया कि बिना भू-अर्जन और बिना मुआवजा के रैयती जमीन पर निर्माण संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन है और सरकार का दावा पहले ही टाइटल अपील में खारिज हो चुका है.
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